मुख्यपृष्ठसमाचारलेह में भड़की विद्रोह की चिंगारी!

लेह में भड़की विद्रोह की चिंगारी!

-केंद्र की लापरवाही पर खुलकर शुरू हुआ विरोध

सुरेश डुग्गर / जम्मू

पिछले ३० सालों के आंदोलन के बाद बर्फीले रेगिस्तान लद्दाख को केंद्र सरकार ने ५ अगस्त २०१९ को केंद्र शासित राज्य का दर्जा दिया, लेकिन लद्दाख वासियों को यह रास नहीं आ रहा है। नतीजतन, बर्फीले रेगिस्तान में आग के शोले केंद्र सरकार की अनदेखी और कथित उपनिवेशवाद की रणनीति भड़का रही है। केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। सरकार की लापरवाही का नतीजा है कि लद्दाख और लेह में अब विरोध की चिंगारी ने जोर पकड़ लिया है। लद्दाख के लेह और कारगिल जिले में लोगों ने  सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बता दें कि प्रदेश को पुन: राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर अब आंदोलनरत लोग अपनी मांगों के समर्थन में सड़क पर उतरने लगे हैं। पिछले एक साल से कई बार अलग-अलग जगह शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। लद्दाख की सर्वोच्च संस्था लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के नेता और वरिष्ठ उपाध्यक्ष चेरिंग दोरजे भी कह रहे हैं कि कश्मीर का हिस्सा होना लद्दाख के लोगों के लिए बेहतर था। वे अब यह भी मानते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की तुलना में जम्मू और कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य में बेहतर थे। दरअसल, लद्दाख अपने अधिकारों का संरक्षण चाहता है। वे विशेषाधिकार तथा पर्यावरण सुरक्षा चाहते हैं। इसके लिए सोनम वांगचुक पांच दिनों तक बर्फ के ऊपर माइनस २० डिग्री तापमान में क्लाइमेट फास्ट भी कर चुके हैं। कल वे भूख हड़ताल पर भी थे। उनके साथ प्रशासन द्वारा किए गए कथित व्यवहार के कारण लद्दाख की जनता का गुस्सा और भड़का है।
लेह जिले के आलची के पास उलेयतोकपो में जन्मे ५६ वर्षीय वांगचुक सामुदायिक शिक्षा के अपने मॉडल के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड पा चुके वांगचुक लद्दाख क्षेत्र को विशेष अधिकारों और पर्यावरण सुरक्षा की मांग के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि हिमालयी क्षेत्र को बचाने के लिए लद्दाख को विशेष दर्जे की जरूरत है। भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत जातीय और जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों और क्षेत्रीय परिषदों के अपने-अपने क्षेत्रों के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया है। फिलहाल, भारत के चार राज्य मेघालय, असम, मिजोरम और त्रिपुरा के दस जिले इस अनुसूची का हिस्सा हैं। लद्दाख की जनता और वांगचुक की मांग है कि लद्दाख को भी इस अनुसूची के तहत विशेषाधिकार दिए जाएं। इस बीच ‘लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन’ के नेता और वरिष्ठ उपाध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने आरोप लगाया हैं कि केंद्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाकर लद्दाखी लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लद्दाख के लिए राज्य और ६ वीं अनुसूची की उनकी मांग को मानने से इनकार कर रहा है। दोरजे कहते थे कि वे हमें मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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