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आजाद मैदान में आंगनवाड़ी सेविकाओं का सैलाब … क्रांतिज्योति जल गई तो खाक हो जाएगी सरकार! … उद्धव ठाकरे का जोरदार हमला

सामना संवाददाता / मुंबई
अपने अधिकारों के लिए पिछले एक महीने से आंदोलन चल रहा है, लेकिन ‘घाती’ सरकार को लाखों आंगनवाड़ी सेविकाओं की समस्याओं पर नजर डालने का समय नहीं है। इसलिए क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती पर, आंगनवाड़ी सेविकाओं की ‘आंधी’ ने मुंबई के आजाद मैदान में धरना दिया है। आप सभी सावित्रीबाई की बेटियां हैं। आपके अंदर सावित्रीबाई की लौ जल रही है। अगर क्रांति की असंख्य लौ एक साथ जल गईं तो सरकार खाक हो जाएगी, ऐसा जबरदस्त हमला कल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने ‘घाती’ सरकार पर बोला। उद्धव ठाकरे के ऐसा बोलते ही तालियां गूंज उठीं। आगे उन्होंने कहा कि आपकी यही एकता एक बहुत बड़ी ताकत है। यदि आपका यही हाथ सरकार के कानों के नीचे पड़े तो कितनी तेज आवाज गूंजेगी? ऐसा सवाल भी उद्धव ठाकरे ने इस दौरान किया।

राज्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पिछले महीने से अपनी प्रलंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन ‘घाती’ सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। जैसे ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का गुस्सा बढ़ा, वैसे ही महाराष्ट्र राज्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एक्शन कमेटी की ओर से मुंबई के आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा ने ‘लाडली बहना’ योजना का वादा किया था। वहां उनकी सरकार भी आ गई। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या महाराष्ट्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आपको ‘प्रिय’ नहीं हैं? इस अवसर पर शिवसेना नेता-सांसद संजय राऊत, सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई, विधायक अजय चौधरी, रवींद्र वायकर, विनोद घोसालकर, वरुण सरदेसाई, अशोक धात्रक, पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर, पूर्व नगरसेविका विशाखा राऊत, रंजना घाडीगांवकर, सुप्रदा फातर्पेकर आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि कोरोना के दौरान जब मैं मुख्यमंत्री था, तब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को हर महीने वेतन मिलता था। अगर गद्दारों ने सरकार नहीं गिराई होती तो लंबित मांगें पूरी हो गई होतीं। यदि राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार होती, तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें अब तक पूर्ण हो गई होतीं। अगर गद्दारों ने सरकार नहीं गिराई होती तो आप लोगों को विरोध करने नहीं आना पड़ता। इसलिए गद्दारों द्वारा लाई गई सरकार गिरने से पहले ही आंगनवाड़ी सेविकाओं की मांगों को पूरा करें, अन्यथा जब हमारी सरकार आएगी तो सबसे पहले आंगनवाड़ी सेविकाओं की मांगों को पूरा करने का निर्णय लिया जाएगा, ऐसी चेतावनी भी उद्धव ठाकरे ने इस दौरान दी।
विज्ञापन पर खर्च करने के लिए पैसा है, लेकिन ‘इंडिया’ बनाने के लिए नहीं!
आप जनता यानी देश की सेवा कर रहे हैं। एक तरह से यही राष्ट्रसेवा है। दिसंबर से आंदोलन चल रहा है, पर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस सरकार को ‘खोके’ सरकार कहा जाता है। उनके पास सरकार लाने के लिए ‘खोके हैं। उनके पास विज्ञापन पर उड़ाने के लिए पैसे हैं, लेकिन उनके पास आंगनवाड़ी-आशा सेवकों को उनका हक देने के लिए पैसे नहीं हैं, ऐसा जबरदस्त तंज भी उन्होंने कसा।
मोटे मंत्री का यह मतलब नहीं कि भारत सुदृढ़ है!
-राज्य में नवजात शिशुओं, छह साल तक के तीन लाख बच्चों को पोषण आहार नहीं मिलता है। कई गर्भवती माताएं, महिलाएं कुपोषित हैं, लेकिन विज्ञापनों में मोटे मंत्रियों की तस्वीरें दिखाई जाती हैं। उद्धव ठाकरे ने यह भी आलोचना की कि मोटे मंत्री की तस्वीर का मतलब यह नहीं है कि भारत सुदृढ़ हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देनेवाले आप लोग वास्तव में भारत को मजबूत कर रहे हैं।
नए साल का नया संकल्प, मेरी सरकार मैं चुनूंगा
ये कृतघ्न लोग हैं, जो आपकी सेवा को नहीं समझते। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ऐसी सरकार आपकी है? ऐसा पूंछते ही एक ही आवाज थी ‘नहीं, नहीं, नहीं’। तो सोचिए कि आनेवाले चुनाव में भाजपा को वोट देना है या नहीं। उन्होंने अपील भी की कि नए साल में नया निर्णय लें, मैं अपनी सरकार खुद चुनूंगा, मैं अपना भविष्य बनाऊंगा।
शिवसैनिकों, बहनों को न्याय मिलने तक उनके साथ खड़े रहो!
-मैं यहां विज्ञापन देने या किसी आंदोलन का नेतृत्व करने नहीं आया, बल्कि आपके भाई के रूप में आपका समर्थन करने आया हूं। मैं आपको बांटने नहीं आया हूं। उद्धव ठाकरे ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से यह भी वादा किया कि आप जब भी बुलाएं, आपका भाई आपके साथ होगा। साथ ही शिवसैनिक पदाधिकारियों और शिवसैनिकों को आदेश दिया कि जब तक आंगनवाड़ी सेविकाओं को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे अपनी बहनों की लड़ाई में साथ रहें, चुपचाप न बैठें, ऐसी अपील भी उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों से की।

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