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डाटा से भी महंगा होगा आटा! टमाटर की देखा-देखी, गेहूं-चावल भी महंगाई की राह पर

सामना संवाददाता / मुंबई मणिपुर पर संसद में हंगामा
कुछ समय पहले इंटरनेट का डाटा काफी महंगा था। मगर अब स्थिति बदल रही है। डाटा से महंगा अब आटा हो गया है। इससे आम आदमी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। पूरे देश में साग-सब्जियों की कीमतों में आग लगी हुई है। खासकर, टमाटर तो सेब और मिठाई से भी महंगा बिक रहा है। अब इसकी देखा-देखी गेहूं और चावल की कीमतें भी रफ्तार पकड़ रहीr हैं। पिछले कुछ दिनों में चावल की कीमत ३ फीसदी, जबकि गेहूं की कीमत कल डेढ़ फीसदी बढ़ गई।
बता दें कि मांग बढ़ने के चलते गेहूं की कीमतों में यह तेजी आई है। इससे आटे का महंगा होना निश्चित है। इसी तरह चावल के दाम में बढ़ोतरी जारी है। खुदरा बाजार में कीमतों में एक साल पहले के मुकाबले ११.५ फीसदी बढ़ोतरी हुई है। उधर सब्जियों और टमाटर के महंगे होने से शाकाहारी थाली पर ६० फीसदी महंगाई का बोझ पड़ चुका है, जबकि मांसाहारी थाली ४० फीसदी महंगी होने के करीब है।
४ महीनों में १८ फीसदी बढ़े दाम पेज २
वैâमरे की नजर में टमाटर
टमाटर की कीमतें आसमान छू रही हैं इसी कारण इनकी चोरी होने लगी है। इससे बचने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में संभाजीनगर से खबर आई है कि वहां एक किसान ने टमाटरों पर नजर रखने के लिए अपने खेत में सीसीटीवी वैâमरा लगा दिया है। शरद रावते नाम के किसान का कहना है कि वह अब और टमाटरों का नुकसान बर्दाश्त नहीं कर सकता। कुछ दिन पहले रावते के खेत से २५-३० किलो टमाटर चोरी हो गए थे, जिसके बाद रावते ने यह कदम उठाया।

मणिपुर पर संसद में हंगामा, मोदी सरकार फेल! ‘इंडिया’ का हमला सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कल लोकसभा में मणिपुर मामले को लेकर जोरदार हंगामा मचा। कल लोकसभा में विपक्ष द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू हुई। विपक्ष का निशाना पीएम मोदी थे, जो मणिपुर मामले में बोलने से बचते रहे हैं। बहस शुरू होते ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने मणिपुर सांप्रदायिक दंगे के मामले में मोदी सरकार को पूरी तरह से फेल बताया। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खासी तल्खी भी देखी गई।
अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में कल पहले दिन काफी गरमा-गरम बहस हुई। मणिपुर से दो सांसद होने के बावजूद भाजपा ने कल पहले दिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया, जबकि कांग्रेस की ओर से पूर्वोत्तर के एक प्रतिनिधि को बोलने का मौका दिया गया। इस पर अविश्वास प्रस्ताव पेश करनेवाले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि वैसे ही उन्हें पूर्वोत्तर के अपने सांसदों को बोलने और राज्य की वास्तविक स्थिति बताने के लिए कहना चाहिए था। इससे पता चलता है कि वे मणिपुर मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं। अब उन्हें संदेह है कि पीएम संसद में बोलेंगे या नहीं? बहस के दौरान कांग्रेस ने मणिपुर में हिंसा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव मजबूरी में लाना पड़ा। सदन में पार्टी के उप नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए रखते हुए यह सवाल भी किया कि प्रधानमंत्री ने मणिपुर का दौरा क्यों नहीं किया और मणिपुर के मुख्यमंत्री (एन बीरेन सिंह) को पद पर क्यों बनाए रखा? उन्होंने दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मौन रहना चाहते हैं क्योंकि उन्हें सिर्फ अपनी छवि से लगाव है और वह अपनी सरकार, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की विफलताओं को सामने नहीं आने देना चाहते। कांग्रेस सांसद का कहना था, ‘यह हमारी मजबूरी है कि हमें यह अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा है। यह संख्या को लेकर नहीं है, बल्कि मणिपुर के इंसाफ के लिए है।’ गोगोई ने कहा, ‘यह अविश्वास प्रस्ताव हम मणिपुर के लिए लाए हैं। आज मणिपुर इंसाफ मांगता है, मणिपुर के युवा, महिलाएं इंसाफ मांगती हैं।’
(पेज ३ और ९ भी देखें)

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