मुख्यपृष्ठसमाचारबहनों की परेशानी भूले `मामा'!.... धूप में प्रदर्शन कर रहीं हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

बहनों की परेशानी भूले `मामा’!…. धूप में प्रदर्शन कर रहीं हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

• हड़ताल से प्रभावित हो रहा पोषण कार्यक्रम

इमरान खान / छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश की शिवराज कैबिनेट जहां इन दिनों पचमढ़ी की ठंडी वादियों में मंथन पर्यटन कर रही है, वहीं प्रदेश भर की हजारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपना मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले २० दिनों से धूप में धरना दे रहीं हैं। आंगनवाड़ी कार्यकताओं के प्रदर्शन के बाद भी शिवराज सिंह चौहान (मामा) बहनों की सुध नहीं ले रहे हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दस हजार रुपए प्रतिमाह जबकि सहायिकाओं को पांच हजार रुपए मानदेय मिलता है। आंगनवाड़ी बुलंद नारी संगठन का कहना है कि बढ़ती मंहगाई में जहां पेट्रोल और गैस के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं वो इतने कम मानदेय में घर वैâसे चलाए। इसके बाद भी सरकार पोषण, टीकाकरण, सर्वे सहित कई काम करा रही है। यहां तक कि कोविड के दौरान भी अपने परिवार की जान की परवाह किए बिना अपनी ड्यूटी निभाई लेकिन खुद को मामा कहलवाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुध नहीं ले रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बीस दिनों से चल रही काम बंद हड़ताल से प्रदेश भर में गर्भवती माताओं एवं शिशुओं का पोषण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। इससे घबराई सरकार ने प्रदेश भर से आंगनवाड़ी बहनों का एक प्रतिनिधि मंडल भोपाल बुलाया लेकिन महिला एवं बाल विकास आयुक्त ने यह कहकर टालने की कोशिश की कि हड़ताल बंद करें तभी बात वैâबिनेट में रखी जाएगी। आंगनवाड़ी संगठन छिंदवाड़ा की जिला अध्यक्ष सविता ठाकुर ने बताया कि जब कमिश्नर से यही बात लिखित में मांगी गई तो उन्होंने साफ कर दिया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित करने का कोई प्रावधान नही है।सरकार की बेरुखी से बौखलाई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वो प्रदेश के हर जिले से धूप में पैदल भोपाल पहुंचेंगी और सी.एम शिवराज सिंह चौहान का घेराव करेंगी। इस बीच नेता प्रतिपक्ष कमलाथ ने आंगनवाड़ी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि महिलाओं की मांग जायज है और सरकार अन्याय पर उतर आई है।

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