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पूर्व मुख्यमंत्री, वरिष्ठ शिवसेना नेता मनोहर जोशी पंचतत्व में विलीन… श्रद्धा और निष्ठा का कोहिनूर खो गया!

सामना संवाददाता / मुंबई

कुशल नेता, प्रभावी वक्ता, सफल उद्यमी और स्पष्टवादी सांसद व बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी महाराष्ट्र के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री मनोहर जोशी उर्फ ​​`सर’ कल पंचतत्व में विलीन हो गए। हिंदुजा अस्पताल में इलाज के दौरान सुबह करीब ३ बजे उनका निधन हो गया। शिवसेना और शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे पर अपार श्रद्धा और निष्ठा का कोहिनूर खो गया है। ऐसी भावना सभी के द्वारा व्यक्त की जा रही है। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वे नगरसेवक पद से लेकर लोकसभा अध्यक्ष पद तक कई प्रतिष्ठित पदों पर रहे। उन्हें उनके अनुशासन और समय की पाबंदी के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
महाराष्ट्र में शोक… देशभर ने अर्पित की श्रद्धांजलि
शिवसेना और शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे पर अपार श्रद्धा और निष्ठा का कोहिनूर खो गया है। उनके जाने से न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश ने एक संस्कारी नेता खो दिया है। शिवसेना के स्वर्णिम इतिहास के गवाह अब अनंत में विलीन हो गए हैं। मनोहर जोशी के निधन की खबर पूरे महाराष्ट्र में फैल गई है और देशभर से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है।
मनोहर जोशी को बुधवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छठी मंजिल पर गहन चिकित्सा इकाई में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख-रेख में उनका इलाज चल रहा था। वहां उनकी हालत और बिगड़ गई और कल सुबह ३:०२ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वे ८६ वर्ष के थे। उनके परिवार में बेटा उन्मेश, दो बेटियां अस्मिता व्यास और नम्रता वाघ, दामाद और पोते-पोतियां हैं।
ब्रेन हेमरेज को हराया
२४ मई २०२३ को मनोहर जोशी को ब्रेन हैमरेज हुआ था। करीब एक महीने तक हिंदुजा अस्पताल में उनका इलाज चला। ब्रेन हेमरेज के इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। इसके बाद उनकी हालत स्थिर थी।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए सुबह ११ बजे से दोपहर ३ बजे तक माटुंगा रूपारेल कॉलेज के पास उनके आवास डब्ल्यू ५४ पर रखा गया था। इसके बाद साढ़े तीन बजे उनका अंतिम संस्कार शुरू हुआ। शाम पांच बजे शिवाजी पार्क स्थित भागोजी कीर श्मशानभूमि में राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। सैकड़ों शिवसैनिकों ने बालासाहेब के इन प्रखर,साहसी और स्वाभिमानी शिवसैनिक को अंतिम विदाई दी।
शिवसेनाप्रमुख के भरोसेमंद सहयोगी
मनोहर जोशी शिवसेना के प्रथम श्रेणी के नेता थे। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में वे जाने जाते थे। शिवसेना की स्थापना में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने ठाकरे परिवार की चार पीढ़ियों के साथ काम किया। इस दौरान कई बदलाव हुए, लेकिन मनोहर जोशी ने शिवसेना का साथ कभी नहीं छोड़ा। वे अंतिम सांस तक शिवसेना का साथ निभाते रहे। एक बहुत ही विद्वान, बुद्धिमान, मेहनती और समर्पित व्यक्तित्व, जो स्व-प्रयास से राजनीति में नई ऊंचाइयों तक पहुंचे, उनका सभी दलों द्वारा सम्मान किया जाता था।
दूरदर्शी नेतृत्व
शिवसेना-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान शिवसेनाप्रमुख ने मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। राज्य का नेतृत्व करते हुए उन्होंने कुशलतापूर्वक दूरदर्शी और साहसपूर्ण फैसले लेकर महाराष्ट्र के विकास को एक नई दिशा दी थी। प्रभावी कामकाज कर प्रदेश को अच्छी स्थिति में लाए थे। संसदीय परंपराओं के प्रकांड विद्वान, तेज-तर्रार वक्ता, कुशल प्रशासक, कुशल राजनीतिज्ञ, दूरदर्शी उद्यमी के रूप में उनके व्यक्तित्व के कई पहलू थे।
नांदवी से `वर्षा’ की यात्रा
मनोहर जोशी का जन्म २ दिसंबर १९३७ को रायगढ़ जिले के नांदवी गांव में हुआ था, उन्हें बचपन से ही संघर्ष का सामना करना पड़ा। गरीबी के कारण उन्होंने भिक्षा मांगकर अपनी १०वीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी की थी। आगे की पढ़ाई के लिए वे मुंबई पहुंचे। उन्होंने सहस्रबुद्धे क्लासेस में एक वॉचमैन के रूप में काम करके आगे की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मुंबई मनपा में क्लर्क के तौर पर भी काम किया, २७ साल की उम्र में उन्होंने एम.ए एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक शिक्षक के रूप में भी नौकरी की। इसी बीच वे शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के संपर्क में आए और शिवसेना में सक्रिय हो गए। शिवसेना में सक्रिय रहते हुए मनोहर जोशी ने मुंबई मनपा के नगरसेवक, महापौर, विधान परिषद सदस्य, विधायक, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, संसद सदस्य, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद के रूप में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वे एक अत्यधिक कूटनीतिक और बुद्धिमान राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते थे।
दौरा बीच में छोड़कर बुलढाणा से लौटे उद्धव ठाकरे
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे बुलढाणा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के दौरे पर थे। मनोहर जोशी के निधन की खबर मिलते ही जनसंवाद दौरा बीच में ही छोड़कर उद्धव ठाकरे मुंबई लौट आए।
प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
सार्वजनिक सेवा में लंबे कार्यकाल वाले एक अनुभवी नेता, नगरपालिका, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियों में उन्होंने योगदान दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में अथक परिश्रम किया। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका करियर उल्लेखनीय रहा। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने संसदीय कार्य प्रक्रिया को अधिक समावेशी और गतिशील बनाने के लिए लगातार प्रयास किया। उन्हें विधानमंडल के चारों सदनों में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मनोहर जोशी को एक मेहनती जनप्रतिनिधि के रूप में हमेशा याद किया जाएगा, ऐसे शब्दों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि दी।
जनसेवा के लिए समर्पित
`पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे दिग्गज नेता श्री मनोहर जोशी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। अपने लंबे सार्वजन्िाक जीवन में, श्री जोशी ने खुद को लोगों के बीच प्रिय बनाया। उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रशंसा अर्जित की और नेताओं ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उन्हें प्यार दिया। उनके परिवार के सदस्यों और समर्थकों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट करती हूं।’
-राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्म

 

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