" /> यूपी के पूर्व मंत्री को हत्या के मामले में उम्रकैद

यूपी के पूर्व मंत्री को हत्या के मामले में उम्रकैद

•मुलायम सिंह यादव की सरकार में राज्य भंडारण निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं गौरीगंज के पूर्व विधायक जंग बहादुर सिंह, अब हैं भाजपा में।
•२६ वर्ष पूर्व अमेठी जिले के पूरब गौरा गांव के प्रधान राम प्रकाश का चुनावी रंजिश में हुआ था कत्ल।
•पुत्र समेत नामजद हुए थे तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख जंग बहादुर सिंह।

यूपी की पूर्ववर्ती मुलायम सिंह यादव सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री रह चुके गौरीगंज (अमेठी) के पूर्व विधायक जंग बहादुर सिंह व उनके पांच समर्थकों को कत्ल के एक मामले में दोषी करार देते हुए स्थानीय अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत का ये फैसला करीब २६ साल बाद आया है, जिसमें उस वक्त जामो के ब्लॉक प्रमुख रहे पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री सिंह को पुत्र दद्दन सिंह सहित नामजद पुलिस ने नामजद किया था।
ये है घटनाक्रम
अमेठी जिले के जामो थानांतर्गत पूरब गौरा गांव के प्रधान राम प्रकाश यादव की चुनावी रंजिश में ३० जून १९९५ की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक़्त जामो के ब्लॉक प्रमुख रहे ‘दबंग’ जंग बहादुर सिंह कांग्रेस में थे। दिवंगत प्रधान के भाई राम उजागिर यादव ने प्रकरण में जंग बहादुर सिंह व उनके बेटे दद्दन सिंह सहित पांच लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना के बाद जामो थाने की पुलिस ने भी नामजद अभियुक्तों को दोषी मानकर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसका ट्रायल सुल्तानपुर के विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए)की अदालत में वर्षों से चल रहा था।

…सजा से बचने की कोई चाल नहीं आई काम!

प्रभुत्व कायम रखने के लिए जंग बहादुर सिंह हमेशा सत्ता में रहनेवाले दल की राजनीति करते रहे। हत्याकांड में नामजद होने के बाद जंग बहादुर सिंह ने राजनीति में लंबी छलांग लगाई और कांग्रेसी चोला उतार समाजवादी चोला धारण कर लिया। फरवरी, २००२ में गौरीगंज के कांग्रेसी विधायक नूर मोहम्मद की असमय मौत के बाद हुए उपचुनाव में सपा के टिकट पर एमएलए चुन लिए गए। यही नहीं उन्हें प्रमोट करते हुए तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह ने राज्य भंडारण निगम का अध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दे डाला। इधर पेशी दर पेशी ट्रायल चलता रहा। इसी बीच दर्जा मंत्री के बेटे व वारदात में अभियुक्त दद्दन सिंह की भी दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। वक़्त की नजाकत को भांप जंग बहादुर भी इस बीच सपा को छोड़ भगवा चोला ओढ़ सत्तासीन भाजपा के खेमे में आ गए लेकिन अदालत में उन्हें इसका कुछ खास लाभ न मिल सका। पेशी के दौरान जिरह-बहस न करके अदालती कार्यवाही को लटकाए रखने को लेकर न्यायाधीश ने बचाव पक्ष पर अर्थदंड भी लगाया। फिलहाल बचाव पक्ष के तमाम अदालती दांव पेंच काम न आए। आखिरकार पूर्व दर्जा मंत्री सहित सभी अभियुक्तों को अदालत ने हत्या का दोषी ठहराया और गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) ने पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री समेत सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना दी है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता रविवंश सिंह आदि ने पैरवी की।