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अधर में अटका चौथा कॉरिडोर! खारकोपर-उरण लोकल कॉरिडोर को सिडको से नहीं मिली निधि

सामना संवाददाता / मुंबई
मध्य रेलवे की बहुप्रतीक्षित रेल परियोजनाओं में से एक नेरुल-बेलापुर-उरण लोकल कॉरिडोर परियोजना अधर में लटक गई है। परियोजना का दूसरा चरण खारकोपर से उरण है। इस परियोजना के अंतर्गत सिडको को अपने हिस्से की जो राशि रेलवे को देनी है, वो समय पर नहीं मिलने के कारण यह परियोजना सुस्त हो गई है। जबकि २७ किमी लंबे इस रेलवे लाइन प्रोजेक्ट में से १२ किमी मार्ग पर नेरुल-बेलापुर और खारकोपर के बीच लोकल सेवाओं का संचालन जारी है, केवल १५ किमी मार्ग के निर्माण के लिए सिडको से निधि समय पर नहीं मिलने के कारण इस परियोजना को पूरा करने में देरी हो रही है। काम में देरी के कारण अब इस परियोजना की नई डेडलाइन मार्च २०२३ कर दी गई है।
बता दें कि खारकोपर-उरण लोकल कॉरिडोर का ७५ फीसदी से अधिक काम हो गया है। मध्य रेलवे के मुताबिक जीएम अनिल कुमार लाहोटी के मार्गदर्शन में इस चौथे कॉरिडोर के काम को गति दी जा रही है। मध्य रेलवे के अधिकारी ने बताया कि सिडको द्वारा समय पर अपने हिस्से की निधि न उपलब्ध कराने से कार्य प्रभावित हुआ है। यदि समय पर निधी मिली तो इस वित्तीय वर्ष के अंत में मार्च २०२३ तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस प्रोजेक्ट में सिडको का हिस्सा ६७ प्रतिशत, जबकि रेलवे का ३३ प्रतिशत है। सिडको द्वारा भूमि हस्तांतरण के बाद काम तेजी से शुरू है। उरण तक पहाड़ी इलाका होने के कारण काम काफी कठिन माना जा रहा है।
२७ किलोमीटर रेल कॉरिडोर
नेरुल और खारकोपर-उरण कुल २७ किमी का अप डाउन रेल कॉरिडोर है। १२.४० किमी का पहला चरण ११ नवंबर २०१८ को ही खोल दिया गया था। खारकोपर-उरण तक १४.६९ किमी मार्ग पर काम हो रहा है। मुंबई से उरण और न्हावा-शेवा पोर्ट को सीधे लोकल से कनेक्ट करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा। इस मार्ग पर पनवेल-जसई-जेएनपीटी क्रॉसिंग लाइन भी है।
चौथे कॉरिडोर पर १० स्टेशन
मध्य रेलवे के इस चौथे कॉरिडोर पर कुल १० स्टेशन हैं। इनमें नेरुल से खारकोपर तक लोकल चल रही है। आगे गावन, रंजनपाड़ा, न्हावा-शेवा, द्रोणागिरी और उरण स्टेशनों का काम हो रहा है। उरण में सबवे, ब्रिज, पुल पर यू-गर्डर स्ट्रैसिंग और लोअरिंग आदि कार्य हो रहे हैं। खारकोपर-उरण के खंड पर ५ स्टेशन, २ बड़े पुल, ४६ छोटे पुल, ४ रोड अंडर ब्रिज और ४ ओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं। बताया गया कि रेलवे की ओर से उनके हिस्से की निधि जारी की जा चुकी है परंतु सिडको के माध्यम से निधि मिलने में देरी होने की वजह से प्रोजेक्ट का काम प्रभावित हो रहा है।

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