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योगी‘राज’ की अनोखी शपथ… सपाई तो पहुंचे पर संतों को न्योता नहीं, रामनगरी में रोष!

• साधु-महंतों ने जताई नाराजगी
सामना संवाददाता / अयोध्या । उत्तर प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व में योगी आदित्यनाथ ने अनोखी शपथ ली, जहां देशभर के तमाम गणमान्यों को न्योता तो भेजा गया लेकिन अपने तप से हिंदुस्थान की धरती को पवित्र बनाने वाले संतों को न्योता नहीं भेजा गया। भाजपा के इस दोहरे रवैये के चलते रामनगरी के संतों में रोष व्याप्त हो गया है। भाजपा के नेतृत्व में योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण में सपाई तो पहुंचे लेकिन संतों को न्योता न भेजकर दरकिनार कर दिया। शपथ ग्रहण में अयोध्या के संतों को न बुलाने पर नाराजगी जताते हुए संतों ने आरोप लगाया है कि शपथ ग्रहण में सपा के लोगों का जमावड़ा हुआ है। बता दें कि सन् २०२२ विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार के गठन को लेकर लखनऊ के स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए जहां देशभर से लोगों को आमंत्रित किया गया था, वहीं अयोध्या के भी कुछ चुने हुए संतों को आमंत्रित किया गया लेकिन इस आमंत्रण में मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास, भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती सहित कई बड़े संतों को आमंत्रण न मिलने से नाराजगी है।
पैसा लेने वाले कई संत हुए थे शामिल
महंत कमल नयन दास ने कहा कि हमारा जो कार्य था हमने किया, हम लोग कोई दिखावा वाले उत्तर प्रदेश में ३५ वर्ष के बाद चौराहे पर जाम लगाने वालों में से नहीं हैं इसलिए हम नहीं गए और हमें जो राष्ट्र के लिए कार्य करना है वह हम कर रहे हैं। कई लोगों को निमंत्रण आया था लेकिन हमारा निमंत्रण नहीं आया इसलिए हम नहीं गए। जाने वालों में ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो अखिलेश से भी पैसा ले चुके हैं।

राम जन्मभूमि के आंदोलन वालों को छोड़ा
भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि २०१७ में भी योगी आदित्यनाथ ने जब शपथ ग्रहण किया था तो उसमें भी नहीं बुलाया गया था और आज जब एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शपथ लिए तो उसमें अयोध्या के कई संत यहां से गए लेकिन जब हमसे पूछा गया कि क्या आप चल रहे हैं तो मैंने कहा कि मुझे कोई निमंत्रण नहीं प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा है कि जो राम जन्मभूमि आंदोलन में नहीं थे ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया लेकिन जो आंदोलन में तन-मन-धन से लगे हुए थे, उनको छोड़ दिया गया।

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