मुख्यपृष्ठसमाचारएमपी में मेडिकल सीटों का हुआ था बंदरबांट....`मामा' के राज में फर्जीवाड़ा!

एमपी में मेडिकल सीटों का हुआ था बंदरबांट….`मामा’ के राज में फर्जीवाड़ा!

• टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट में भी फिर घोटाला
सामना संवाददाता / ग्वालियर । मध्य प्रदेश परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के लिए पहले से ही बदनाम रहा है। व्यापमं में मेडिकल कॉलेज की सीटों की बंदरबांट का फर्जीवाड़ा हो या नर्सिंग का फर्जीवाड़ा सभी में सरकार की आंखों के सामने ही खूब मनमानी की गई। भाजपा सरकार में अब फिर मध्य प्रदेश टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट में भी फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। बता दें कि यह खुलासा ग्वालियर के सिकंदर कंपू निवासी मदन मोहन दौहरे ने किया है। मदन मोहन शिक्षा विभाग में नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं। वह प्राथमिक शाला वर्ग-३ की परीक्षा देने के लिए भोपाल गए थे। रायसेन रोड पर एक स्कूल में सेंटर पड़ा था। ट्रेन से ग्वालियर लौटते समय एक युवक ने अपना परिचय लक्ष्मण के रूप में दिया। उसने बताया कि सिलेक्शन के लिए रैकेट चलता है। उसने अपने मोबाइल में परीक्षार्थी को उसी दिन आया पेपर दिखाया। मदन का दावा है कि उसने चेक किया तो १०० फीसदी वही पेपर था। उसने अपने मोबाइल में दिखाया कि रात को ही पेपर उसके पास आ गया था।।
क्या ऐसे ही होता रहेगा फर्जीवाड़ा?
एक परीक्षार्थी मेहरबान सिंह वर्मा ने सीएम को ट्वीट करते हुए लिखा है कि शिवराज सिंह जी ये क्या हो रहा है। टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट का पेपर लक्ष्मण सिंह के मोबाइल में वैâसे आया। क्या इसी प्रकार सभी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा होता रहेगा। बेरोजगारों की प्रतिभा का ऐसे ही हनन होता रहेगा। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई हो।
कांग्रेस ने की जांच की मांग
इस मामले को लेकर कांग्रेस के नेता सरकार पर हमलावर हो गए हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पीसी शर्मा सहित कई नेताओं ने ट्वीट कर इस मामले की जांच कराने की मांग की है। एक ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह ने लिखा कि यह गंभीर आरोप है। इसकी जांच तत्काल होनी चाहिए।

भोपाल में चल रहा है रैकेट
ट्रेन में मिले एजेंट ने परीक्षार्थी मदन मोहन को बताया कि ग्वालियर, भोपाल में कई कॉलेज में सब कुछ पहले से सेट होता है। पेपर पहले ही पहुंच जाता है। इसके लिए ४ से ५ लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इस पर परीक्षार्थी ने जब कॉलेज के नाम पूछे तो उसने नहीं बताया। परीक्षार्थी मदन मोहन दौहरे ने कहा कि मैं इस बात को अभी तक नहीं समझ पा रहा हूं कि उस युवक के मोबाइल में पेपर वैâसे आया? युवक ने तो यही बताया कि पेपर पहले ही लीक हो चुका था।

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