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दिल्ली से : किसान आंदोलन

-दिल्ली का व्यापार ठप… मजदूर भूख से परेशान

योगेश कुमार सोनी

किसान आंदोलन को देखते हुए सभी बॉर्डर पर बंद किए गए रास्तों के कारण हजारों फैक्ट्रियों पर ताला लग गया है। इससे लाखों कामगार परेशान हैं। सभी को चिंता सताने लगी है कि यदि पिछली बार की तरह एक साल तक रास्ता बंद रहा तो काम छूट जाएगा और भूखे मरने तक की नौबत आ जाएगी। चूंकि दिल्ली में लाखों बाहरी मजदूर रोजाना दिहाड़ी पर काम करते हैं और जीवन निर्वाह करते हैं। दिल्ली में सभी बॉर्डर पर लाखों फैक्ट्रियां लगी हैं। इन फैक्टीज में बिहार, उत्तर प्रदेश व हरियाणा के रहनेवाले कई मजदूर हैं, जो अपना गांव छोड़कर केवल रोज की दिहाड़ी पर काम करते हैं। स्पष्ट है कि व्यापार न चलने की वजह से बाकी चीजें भी ठप हो रही हैं। चूंकि हर चीज एक-दूसरे से जुड़ी है। व्यापार खत्म होने से पर्यटक स्थल, होटल इंड्रस्टी व अन्य महत्वपूर्ण चीजें थम जाती हैं। देखा जा रहा है कि सरकार के कुछ नेता किसानों से बात करने में लगे हैं लेकिन हल अभी भी नहीं निकाला और यदि स्थिति पहले वाली होती है तो दिल्ली व सटे राज्यों का मानचित्र बदल जाएगा और परेशानी बहुत बढ़ जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में जो हर रोज कई घंटों का जाम लग रहा है। उसमें सवा करोड़ रुपए का ईंधन अतिरिक्त लग रहा है, जिससे सब्जियां व फल के अलावा आम जनता से जुड़ी अहम चीजें हर रोज मंहगी हो रही हैं। यह दुर्लभ तस्वीर अब परेशान कर रही है। सरकार को यहां किसी भी स्थिति में किसानों आंदोलन का समाधान करना होगा। यदि कोई भी घटना एक ही उद्देश्य को लेकर होने लगे तो सरकार की कार्यशैली पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगते हैं। हर बार दिल्लीवासी इतना बड़ा दंश झेलने के लिए तैयार नही हैं। चूंकि किसी भी घटना की समय सीमा निर्धारित होना अनिवार्य है। बहरहाल,फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर व अन्य सड़कों पर बैठकर समय गुजार रहे हैं। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि काम बंद होने से दिक्कत हो गई है। सभी बोल रहे हैं कि एक साल तक कोई काम नहीं होगा। घर की सभी तरह की जिम्मेदारियां उनके उपर हैं और यदि पैसा गांव नहीं पहुंचाया तो भूखे मरने तक की नौबत आ जाएगी। सामान उठाने वाले एक कुली ने बताया कि फैक्ट्री चलने पर दूसरे लोगों को भी काम मिलता है लेकिन रास्ता बंद होने से सब ठप हो गया है। न तो फैक्ट्री चल रही है और न काम करने वाले यहां दिख रहे हैं। ऐसे में उनका काम भी बंद हो गया। कोई सामान ढोने के लिए भी नहीं बुला रहा है। इसके अलावा बॉर्डर पर चाय समोसे की दुकान चलानेवाले एक दुकानदार ने बताया कि बॉर्डर सील होने के बाद से काम खत्म हो गया है। यहां रोज शाम को सैकड़ों मजदूर चाय व समोसा खाने आते थे लेकिन अब दुकान चलाना भी मुश्किल हो गया है। किसान और सरकार की लड़ाई में गरीबों को पिसना नहीं चाहिए। एक छोटी-सी भी लड़ाई हर मिनट कितना नुकसान कर रही है यह हम भलीभांति देख रहे हैं इसलिए सरकार को किसानों से बातचीत करके जल्द ही हल निकालना चाहिए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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