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लद्दाख में रोमांच ही रोमांच! …जंस्कार नदी बनेगी ट्रेकिंग रूट

–सुरेश एस डुग्गर–
जम्मू। रोमांच और साहसिक ट्रेकिंग के इच्छुक लोगों को बस दो दिनों का इंतजार और है जब वे जंस्कार में बर्फ से पूरी तरह से जमी हुई नदी पर ट्रेकिंग में शामिल होंगें। 8 जनवरी इस नदी को खोल कर इसे ट्रेकिंग रूट में बदल दिया जाएगा और इस पर 20 फरवरी तक ही ट्रेकिंग की जा सकेगी।

लद्दाख की जंस्कार घाटी में जंस्कार नदी पर होने वाला चद्दर ट्रेक सिर्फ लद्दाख प्रेमियों को ही नहीं बल्कि एडवेंचर के उन शौकिनों को भी आकर्षित करता है जो जोखिम उठाने में बहुत मजा आता है। सर्दियों के मौसम में जम चुकी जंस्कार नदी की बर्फीली चादर से ही इस ट्रेक को अपना नाम चद्दर ट्रेक मिला है। जम चुकी बर्फीली नदी पर चलते हुए इस ट्रेक को पूरा करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है उतना ही एडवेंचरस भी होता है।

चद्दर ट्रेक की गिनती कठिनतम ट्रेक में होती है। इसका बेस कैंप लेह से करीब 60-70 किमी दूर तिलाद में होता है। इसलिए सबसे पहले आपको लेह पहुंचना होगा और वहां से बेस कैंप जाना पड़ेगा। तिलाद से ट्रेकिंग शुरू कर चिलिंग के माध्यम से चद्दर ट्रेक के डेस्टिनेशन पर पहुंचा जाता है। चिलिंग से आप जैसे-जैसे जंस्कर नदी के किनारे-किनारे आगे बढ़ते हैं, जंस्कर नदी जमने लगती है। लगभग 105 किमी लंबे इस ट्रेक को पूरा करने में लगभग 9-15 दिनों का समय लगता है।

हालांकि चद्दर ट्रैक में शामिल होने वालों की सेहत और दुर्घटनाओं से निपटने की तैयारियां भी लेह स्वास्थ्य विभाग ने आरंभ कर दी है और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि इसमें शामिल होने वालों की जान व सेहत का बीमा होना आवश्यक शर्त के तौर पर लागू किया जाए।

ट्रेकिंग के आयोजन से जुड़े लद्दाख आल ट्रैवल टूर आपरेटर यूनियन के प्रधान डेलेक्स नामग्याल कहते थे कि सिर्फ पंजीकरण करवाने वाले ट्रेकरों को ही इसमें शिरकत करने की अनुमति दी जाएगी। इसकी खातिर पर्यटन विभाग की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं जिसने लेह, के गुरू, शिगरा योकमा और चद्दर ट्रैक पर कैंप स्थापित किए हैं ताकि जरूरत होने पर ट्रैकरों कोसहायता मुहैया करवाई जा सके।

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