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चादर बिछाने से लेकर साफ-सफाई का चार्ज …एक रुपए की पर्ची, २ हजार का इलाज!

• अस्पतालों में मरीजों को २ दिन तक नहीं मिलता इलाज
 शेष सिंह
यूपी में भाजपा की योगी सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं रामभरोसे चल रही हैं। सत्ता के नशे में भाजपा के मंत्री से लेकर विधायकों को यूपी की जनता से कुछ लेना-देना नहीं है। यूपी में अस्पतालों की ये हालत हो गई है कि मरीजों को इलाज के लिए दो-दो दिन का इंतजार करना पड़ता है। उन्नाव के हसनगंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का यह हाल है कि मरीज के परिवारवाले अस्पताल के बाहर मौजूद एक पेड़ के नीचे बैठे दिखाई दे देते हैं। उनका कहना है कि अस्पताल के अंदर लाइट की सुविधा नहीं है। गर्मी में मरीजों को घबराहट हो रही है इसलिए पेड़ के नीचे बैठे हैं। अस्पताल में मिल रही सुविधाओं का सवाल पूछने पर पसीना पोंछते हुए मरीज बातों-बातों में कह देते हैं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक इतने अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, एक बार यहां भी आ जाते तो इसके भी हालात ठीक हो जाते। ये सिर्फ इस अस्पताल की कहानी नहीं है। यूपी के कई ऐसे अस्पतालों के हालात हैं, जहां लोग खराब सुविधाओं की वजह से परेशान हैं।

हैलट अस्पताल के भरोसे हैं २० लाख लोग
कानपुर के हैलट अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में न पर्याप्त बेड हैं, न ही सुविधाएं। दोनों बच्चों को अलग-अलग बीमारियां हैं फिर भी एक ही बेड पर उनका इलाज किया जा रहा। पोस्टमार्टम के बाद वहां मौजूद स्टाफ डेडबॉडी पैक करने के लिए परिवार वालों से एक से डेढ़ हजार रुपए की मांग करते हैं। कई परिवार जिनके पास पैसा नहीं होता, उन्हें खुद ही अपनों की बॉडी पैक करनी पड़ती है।

जमीन पर हैं गर्भवती महिलाएं
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को बच्चा होने के बाद बेड दिया जाता है। महिलाओं को बच्चा होने तक जमीन पर लेटना पड़ता है। अस्पताल में रोज करीब ७०० मरीज आते हैं। डॉक्टर्स की केबिन खाली पड़ी रहती है, जिस वजह से मरीजों को अस्पताल में डॉक्टर के लिए भटकना पड़ता है।

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