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किसानों के समर्थन में निकला मोर्चा, सहन नहीं करेंगे किसानों पर हो रहा अन्याय, राकांपा नेता अनिल देशमुख ने दी घाती सरकार को चेतावनी

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सूखे और बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। हालांकि, प्रदेश की घाती सरकार किसानों तक पर्याप्त मदद पहुंचाने में विफल रही है। यहां बड़ी संख्या में किसानों तक मदद नहीं पहुंच रही है। घाती सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों की उपज को बाजारों में उचित मुल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों की इन समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय यह सरकार कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है। इस कुंभकर्णी नींद से सरकार को जगाने के लिए किसान आक्रोश मोर्चा निकाला गया। इस मोर्चे के बाद राकांपा के नेता व विधायक अनिल देशमुख ने चेतावनी देते हुए कहा है कि हम किसानों पर हो रहे अन्याय को कदापि सहन नहीं करेंगे। वे काटोल में मोर्चा को संबोधित कर रहे थे।
काटोल और नरखेड तालुका के किसानों ने कल किसानों के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने के लिए अनिल देशमुख और पूर्व महापौर राहुल देशमुख के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला। मौजूदा समय में विदेशों से आयातित कपास के कारण देश में किसानों के कपास की कीमत गिर गई है। कपास के संबंध में आयात और निर्यात नीति में १४,००० रुपए के मूल्य पर निर्यात किया जाना चाहिए। सोयाबीन का भाव भी इसी प्रकार ८००० रुपए होना चाहिए। विदर्भ से संतरे बांग्लादेश को निर्यात किए जाते हैं। लेकिन निर्यात शुल्क १८ रुपए से बढ़ाकर ८८ रुपए कर दिया गया। इस कारण संतरे का निर्यात नहीं होने के कारण उन्हें उचित कीमत नहीं मिल पाती है। इसके लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार से बात करनी चाहिए। बड़ी मात्रा में अरहर दाल के आयात के कारण इसकी कीमत में गिरावट आई है। जिस अरहर दाल की कीमत १४,००० रुपए थी, वह घटकर अब ७,००० रुपए पर आ गई है। भारी बारिश से नुकसान के बावजूद ४० फीसदी किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। बीमा कंपनियां फसल बीमा कवरेज देने में अनिच्छुक हैं। अनिल देशमुख ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को २० रुपए, २५ रुपए और ५० रुपए की मदद देकर उनका मजाक उड़ा रही है। भाजपा नेताओं का किया पर्दाफाश
इस मौके पर अनिल देशमुख ने कहा कि जब वे विपक्षी पार्टी में थे, तो भाजपा नेता किस तरह मांग कर रहे थे। विरोधी पक्षनेता रहते हुए देवेंद्र फडणवीस ने सोयाबीन को छह हजार रुपए कीमत देने की मांग साल २०१३ में की थी। इसके बाद साल २०१४ में वे खुद ही मुख्यमंत्री बन गए। लेकिन उन्होंने सोयाबीन को उचित कीमत नहीं दी। अनिल देशमुख ने उसी सोयाबीन और कपास के दाम मांगने का वीडियो जनता को दिखाया। इसके साथ ही उन्होंने कई वीडियो दिखाकर भाजपा नेताओं का पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया।

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