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फल बेचने वालों ने किया ५०० करोड़ का फर्जीवाड़ा! … संपत्ति को हड़पने का लगा आरोप

•  हाई कोर्ट ने ट्रांसफर पर लगाई रोक
सामना संवाददाता / भोपाल 
मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मामले के अनुसार आनंद चौधरी नाम के एक शख्स ने आरोप लगाया है कि उनकी बुआ प्रभा मुखर्जी की करीब ५०० करोड़ की संपत्ति फर्जी तरीके से दूसरे लोगों ने अपने नाम करवा ली, उसके बाद उनकी संदिग्ध तरीके से मौत हो गई। जिन लोगों ने इस फर्जी काम को अंजाम दिया है वे फल बेचने का काम करते हैं और प्रभा मुखर्जी के घर में ही किराए पर रहते थे। आनंद चौधरी की याचिका पर हाई कोर्ट ने वसीयत के आधार पर संपत्तियों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी है और जबलपुर पुलिस को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं।
पांच सौ करोड़ की संपत्ति का विवाद 
होशंगाबाद के निवासी आनंद चौधरी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने अपनी बुआ प्रभा मुखर्जी की संदिग्ध तरीके से हुई मौत और वसीयत की जांच करने की मांग की है। आनंद चौधरी ने अपनी शिकायत में कहा है कि प्रभा मुखर्जी के पास केबल बड़ा फुहारा इलाके में २५,००० वर्ग फुट की एक कोठी थी। इसके अलावा जबलपुर और होशंगाबाद में ४०० एकड़ जमीन थी। जबलपुर शहर में इस कोठी के अलावा कई दूसरे स्थानों पर जायदाद थी, बड़े प्लॉट्स और कई घर थे।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा 
एडवोकेट प्रशांत पाठक का कहना है कि किसी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि प्रभा मुखर्जी की मौत कैसे हुई और वह अपनी संपत्ति किसके नाम पर करके गई हैं। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद अशरफ ने होशंगाबाद में प्रभा मुखर्जी की १०० एकड़ जमीन पर अपना नाम दर्ज करवाने के लिए आवेदन दिया और इस आवेदन में उन्होंने एक वसीयत लगाई। जब इस वसीयत की जानकारी आनंद चौधरी को पता लगी तब उन्होंने इस मामले की पड़ताल शुरू की। जांच में प्रभा मुखर्जी की दो वसीयत सामने आई जो दोनों ही अलग-अलग अशरफ के नाम पर थीं। इसके बाद आनंद ने पड़ताल शुरू की तो पता लगा कि उनकी मृत्यु २४ अप्रैल २०१५ को हुई जो रिकॉर्ड में दर्ज है लेकिन उनका अंतिम संस्कार २९ अप्रैल २०१५ को करवाया गया। अंतिम संस्कार में मात्र ३ लोग शामिल थे।

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