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राशि कम, महंगाई की मार … गोविंदा हुए बेजार! … बारिश ने भी बढ़ाई मुश्किलें

सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में प्रत्येक नागरिक बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा है। महंगाई और बेरोजगारी से आज किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी और महिलाएं सभी त्रस्त होकर सड़कों पर आंदोलनरत हैं। महंगाई डायन ने इस बार इस कदर कहर बरापाया है कि मुंबई और ठाणे समेत महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के सार्वजनिक गोविंदा मंडलों को परेशान कर दिया और उन्होंने मटकी फोड़नेवाले गोविंदाओं के लिए इनाम की राशि ही कम रखी। इनाम की राशि कम होने से गोविंदा भी बेजार दिखाई दिए। इसी में मुंबई और आस-पास के क्षेत्रों में भारी बारिश ने न केवल गोविंदाओं की मुश्किलें बढ़ा दीं, बल्कि उनके हौसलों को भी कम कर दिया।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों में दही-हंडी उत्सव एक भव्य आयोजन में बदल गया है। कृष्ण जन्माष्टमी मनाने के लिए शुरू हुआ दही-हंडी का खेल, अपने पारंपरिक रूप से हटकर एक इवेंट-सा बनता जा रहा है। कोरोना महामारी के पहले जहां गोविंदा मंडल दही-हंडी फोड़नेवाले गोविंदा पथकों पर लाखों रुपए के पुरस्कार की राशि उड़ाते थे। इससे गोविंदाओं में मटकी फोड़ने के लिए होड़ मची रहती थी। मुंबई के कई गोविंदा पथकों ने अधिकतम १० थर का मानवी पिरामिड बनाकर मटकियां फोड़ी हैं। हालांकि, महामारी के बाद इस साल बिना किसी प्रतिबंध के मनाए गए दही-हंडी उत्सव पर महंगाई का ग्रहण लग गया है। महंगाई के चलते इस साल दही-हंडी मंडलों ने इनाम की राशि को बहुत कम कर दिया। इनाम की राशि कम होने से गोविंदाओं में उत्साह कम दिखाई दिया। हालांकि, इतना जरूर था कि आयोजन स्थलों पर गोविंदाओं की टीमें कतार में लगकर मटकी फोड़ने की कोशिश करने के साथ ही तेज संगीत पर थिरकती हुई दिखीं। कुछ जगहों पर लाइव म्युजिक तो कहीं डीजे की धूम रही। हालांकि, मुंबई शहर और आस-पास के क्षेत्रों में सुबह से भारी बारिश ने गोविंदाओं के उत्साह को कम कर दिया।

घटी इनाम की राशि
मुंबई और ठाणे में दही-हंडी फोड़ने पर दी जानेवाली इनाम की राशि इस साल घट गई है। जानकारी के अनुसार, विभिन्न मंडलों ने पहले तो मटकी फोड़नेवाले गोविंदा पथकों को इनाम के रूप में लाखों रुपए की राशि देने की गाजर दिखाई थी। हालांकि, बाद में उसे खंड-खंड में देना शुरू कर दिया। इसके चलते गोविंदाओं में मायूसी दिखाई दी।

सुबह से निकली गोविंदा टीमें
‘बोल बजरंग बली की जय’ के नारे लगाते हुए रंग-बिरंगी टी-शर्ट पहने गोविंदा और गोपियों की टीमें सुबह-सुबह घर से निकली। हालांकि, सुबह से ही वरुणराज की मौजूदगी से खुशी निराशा में बदल गई। वहीं नाकों-नाकों पर दही-हंडी फोड़ने की होड़ में मुंबई शहर और उपनगरों में जाम की स्थिति को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। साथ ही मनपा अस्पताल भी घायल गोविंदाओं का इलाज करने के लिए तैयार थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही गोविंदा टीमों के उत्साह को बढ़ाने के लिए मशहूर हस्तियों की उपस्थिति इस साल भी देखी गई। दादर, वर्ली, प्रभादेवी, लालबाग-परेल, गिरगांव, भायखला, अंधेरी, गोरेगांव, बोरीवली, कांजुरमार्ग और अन्य इलाकों में दही-हंडी का कुछ हद तक उत्साह देखा गया।

उत्सव से सामाजिकता चेतना का भान
उत्सव के माध्यम से गोविंदा टीमें सामाजिक चेतना का भान रखती नजर आर्इं। गोविंदा टीमों की टी-शर्ट पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘पेड़ लगाओ, पेड़ जिंदा करो’ जैसे सामाजिक संदेश दिखे। दादर के आइडियल में दही- हंडी उत्सव में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई गई।

१०७ गोविंदा हुए घायल
मुंबई में रात आठ बजे तक दही-हंडी उत्सव के दौरान १०७ गोविंदा घायल हो गए। जिसमें १४ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जबकि ६२ को डिस्चार्ज किया गया है, जबकि ३१ गोंविदाओं का ओपीडी में इलाज हुआ। मनपा अधिकारी ने बताया कि घायल गोविंदाओं में से आठ को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मुंबई के परेल स्थित केईएम अस्पताल में ३१ घायल गोविंदाओं को लाया गया। इनमें से ७ को भर्ती किया गया, जबकि शेष का इलाज कर छुट्टी दे दी गई। इसी तरह सायन में सात, नायर में तीन, जेजे अस्पताल में तीन, सेंट जार्ज में तीन, जीटी अस्पताल में दो, पोद्दार में सोलह, मुंबई अस्पताल में एक, राजावाड़ी में दस, एमटी अग्रवाल अस्पताल में एक, वीर सावरकर अस्पताल में एक, शताब्दी में दो, बांद्रा स्थित भाभा में तीन, वीएन देसाई अस्पताल में चार, कूपर अस्पताल में छह, ट्रामा केयर में चार और बीडीडीए अस्पताल में नौ घायल गोविंदाओं को ले जाया गया।

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