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जम्मू-कश्मीर में गॉल ब्लैडर की भारी बीमारी! … ३३ महीनों में आयुष्मान योजना का २२० करोड़ रुपया हुआ इसी पर खर्च

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू
जम्मू-कश्मीर में पिछले ३३ महीनों के भीतर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत जो इलाज किए गए, उनमें सबसे बड़ी बीमारी गॉल ब्लैडर से जुड़ी हुई थी। यह सरकारी आंकड़ों से भी साबित होता है, जिसमें बताया गया है कि इस अवधि में गॉल ब्लैडर की बीमारियों को दूर करने के लिए २२० करोड़ का भुगतान किया गया है।
इन आंकड़ों के बाद अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि प्रदेश में वैंâसर के बाद जम्मू-कश्मीर की जनता सबसे अधिक गॉल ब्लैडर की बीमारियों से जूझ रही है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले ३३ महीनों में प्रदेश के ७८,२०९ लोगों के गॉल ब्लैडर को ऑपरेशनों द्वारा निकाला गया है और इसके लिए विभिन्न चिकित्सा संस्थानों को २२० करोड़ का भुगतान किया गया है।
इसमें भी चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस बीमारी से ज्यादातर पीड़ित कश्मीर से संबंध रखने वाले थे। करीब ६६ प्रतिशत कश्मीरियों के गॉल ब्लैडर के ऑपरेशन पिछले ढाई सालों में किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि कश्मीर वादी में ५२,३४७ लोगों के गॉल ब्लैडर को ऑपरेशन करके वर्ष २०२१ के बाद निकाले गए हैं, जिसके लिए सरकार ने १३० करोड़ का भुगतान किया है।
इन क्षेत्रों में सामने आए मामले
आंकड़ों के मुताबिक, कश्मीर में गॉल ब्लैडर की बीमारी से सबसे अधिक ग्रस्त लोग बारामुल्ला में थे और सबसे कम बांडीपोरा में थे। वर्ष २०२१ से अनंतनाग में ७४८९, बडगाम में ६७१२, बारामूला में ८,७६४ और बांदीपोरा में २,२२१ मरीज थे। इसी प्रकार बांदरबल में २,४३३, कुलगाम में ३,६४५, कुपवाड़ा में ३,७९२ तथा पुलवामा में ५,०५४ मामले सामने आए थे।
गॉल ब्लैडर को ही
निकालना अंतिम विकल्प
स्टेट हेल्थ एजेंसी के एक अधिकारी का मानना है कि प्रदेश में लोग इस योजना के तहत सबसे अधिक गॉल ब्लैडर की बीमारियों पर पैसा खर्च कर रहे हैं। इसके प्रति कई डॉक्टरों का मानना है कि प्रदेश में खासकर, कश्मीर में लोगों के खानपान के पैटर्न के कारण लोगों को इस बीमारी से जूझना पड़ रहा है। एक प्रसिद्ध सर्जन डॉ. इम्तियाज अहमद वानी का मानना है कि पित्ताशय की पथरी की समस्या से जूझ रहे मरीजों के शरीर से गॉल ब्लैडर को ही निकाल देना अंतिम विकल्प होता है, पर जम्मू-कश्मीर में इसे प्राथमिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

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