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गंगा अभी भी मैली ही है…! कैसे निर्मल होंगी मोक्षदायिनी मां गंगा?

  • चौंकानेवाला खुलासा… नहाना तो छोड़िए आचमन के लायक भी नहीं है ‘गंगा जल’

सामना संवाददाता / वाराणसी

केंद्र की मोदी के नेतृत्ववाली भाजपाई सरकार गंगा नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल रखने के लिए भले ही करोड़ों रुपए की लागतवाली `नमामि गंगे’ योजना चला रही हो लेकिन इसके बावजूद गंगा मैली हो रही है। राम तेरी गंगा मैली हो गई… अब ये बात महज फिल्मी नहीं रह गई। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाने के बाद भी आज स्थिति यह है कि गंगा का जल नहाना तो दूर की बात आचमन के लायक भी नहीं रह गया है। गौरतलब है कि मोदी सरकार गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए `नमामि गंगे’ योजना तो चला रही है लेकिन गंगा की सफाई को लेकर सरकार के दावों की पोल समय-समय पर खुलती रही है। एक संस्था ने हाल ही में यह दावा किया है कि गंगा का पानी नहाने के लिए तो छोड़िए आचमन करने के योग्य भी नहीं है।
मिली जानकारी के अनुसार संकट मोचन फाउंडेशन ने गंगा जल की शुद्धता को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में यह पाया है कि गंगा जल में फेकल कॉलीफॉर्म मानक से कई गुना अधिक पाया गया है, जो गंगा नदी का पानी उपयोग करनेवालों के लिए चिंताजनक है। इससे पहले भी इस संस्था की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि गंगा के पानी में कॉलीफॉर्म और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) में बढ़ोतरी हुई है।
आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर और फॉउंडेशन के अध्यक्ष विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि गंगा में सीधे गिरनेवाले कई नाले बंद तो जरूर हुए हैं लेकिन कहीं न कहीं उसका पानी गंगा में आ ही रहा है।
बता दें कि अस्सी और वरुणा से बड़ी मात्रा में सीवेज का पानी गंगा में जा रहा है, जिसके कारण वहां पेâकल कॉलीफॉर्म करोड़ों में है।
नहाने के पानी में फेकल कॉलीफॉर्म १०० मिलीलीटर में ५०० से कम होना चाहिए। लेकिन गंगा में जहां अस्सी मिलती है, वहां ३ करोड़ १० लाख और डाउन स्ट्रीम में जहां वरुणा मिलती है, वहां ६ करोड़ के करीब है। १४ जुलाई की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आया है। इसके अलावा तुलसीदास पर ६५ हजार, शिवाला घाट पर ३५ हजार, राजेंद्र प्रसाद घाट पर २१ हजार और ललिता घाट पर १६ हजार है, जो साफ दर्शाता है कि गंगा जल में बड़ी मात्रा में सीवेज का पानी है। लेकिन फिर भी श्रद्धा है कि लोग गंगा में स्नान कर रहे हैं। फिलहाल तो मोदी सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को स्वच्छ रखने में केंद्र सरकार पूरी तरह से असफल होती नजर आ रही है। इस प्रोजेक्ट में भले ही करोड़ों रुपए बहाए जा रहे हों लेकिन गंगा आज भी मैली ही रह गई है।

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