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आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के साथ ‘घाती’ सरकार ने किया घात!

-हड़तालियों की मांग को ठुकराया… अब पढ़ाएंगे बीएड और ग्रेजुएट्स

सामना संवाददाता / मुंबई

पेंशन लागू करने, सेवा में स्थाई करने, मानधन की जगह मासिक वेतन देने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने जैसी मुख्य मांगों को लेकर राज्य भर की सभी आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाएं तीन दिसंबर से हड़ताल पर हैं। इस पृष्ठभूमि में ‘घाती’ सरकार अन्य मामलों की तरह इनको भी धोखा देने का काम किया है। एकीकृत बाल विकास योजना के आयुक्त ने तीन दिसंबर से हड़ताल में शामिल आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को मानधन की मांग को ठुकरा दिया है। ‘घाती’ सरकार के निर्देश पर अब आयुक्त रूबल अग्रवाल ने आंगनवाड़ियों में बच्चों के लिए एक विकल्प तैयार किया है, जिसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग की मदद ली जाएगी। बताया जाता है कि सरकार की तरफ से अब आंगनवाड़ियों में बीएड और ग्रेजुएट्स से पढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में एक लाख नौ हजार से अधिक आंगनवाड़ी सेविका और सहायिकाएं हैं। इन आंगनवाड़ियों में ६० लाख से ज्यादा बच्चों का नाम लिखा गया है। फिलहाल, राज्य स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बच्चों को पोषाहार भी नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं आंगनवाड़ियां बंद होने के कारण वे वहां नहीं जा पा रहे हैं।
शिक्षण के लिए स्नातक छात्रों की सहायता
कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण राज्य में आंगनवाड़ियां पिछले २३ दिनों से बंद हैं। बच्चों को न तो पोषण आहार बनाया जा रहा है और न ही शिक्षा मिल रही है। जिला परिषद स्कूलों के पास आंगनवाड़ियों के मुद्दे को हल तो किया जा रहा है लेकिन जिला परिषद स्कूलों से दूर गांवों या बस्तियों में स्थित आंगनवाड़ियों में बच्चों की सहायता गांव के डी.एड, बी.एड या स्नातक डिग्री वाले युवाओं द्वारा की जाएगी। सामाजिक प्रतिबद्धता के तहत उनसे हड़ताल खत्म होने तक कुछ घंटे बच्चों को पढ़ाने का आग्रह किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें इसके लिए कोई मानधन और लिखित आदेश नहीं मिलेगा।
हड़ताल का समाधान होने तक आंगनबाड़ियों में पढ़ाएंगे शिक्षक
जिला परिषद स्कूलों और आंगनबाड़ियों में जानेवाले बच्चों को स्कूल के समय के दौरान पोषण आहार स्कूल के माध्यम से दिया जाएगा। दूसरी ओर जिला परिषद स्कूलों से दूर आंगनवाड़ियों में स्वयं सहायता गुटों के माध्यम से पोषण आहार उपलब्ध कराने की योजना है। लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। साथ ही हड़ताल का समाधान होने तक जिला परिषद के शिक्षकों को आंगनवाड़ियों में बच्चों को पढ़ाना होगा। इसकी जिम्मेदारी जिला परिषद स्कूलों में कक्षा १-२ के शिक्षकों को सौंपी जाएगी। लेकिन उन शिक्षकों की क्या भूमिका होगी, क्या वे प्राथमिक शिक्षा पदाधिकारी के निर्देशों का पालन करेंगे, इस पर सभी की नजर है।

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