मुख्यपृष्ठनए समाचारघाती सरकार ने किया अनसुना  ...‘दादा' के दरबार में पहुंचे रेजिडेंट डॉक्टर

घाती सरकार ने किया अनसुना  …‘दादा’ के दरबार में पहुंचे रेजिडेंट डॉक्टर

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की घाती सरकार की मेहरबानी से मुंबई में रेजिडेंट डॉक्टर अभी भी जर्जर हॉस्टलों में रहने के लिए बाध्य हैं। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर की सीटें रिक्त होने से रेजिडेंट डॉक्टरों के शैक्षिक वर्ष का नुकसान हो रहा है। इस तरह कई अन्य समस्याओं को दूर करने की मांग को लेकर डॉक्टर्स हड़ताल भी कर चुके हैं। लेकिन इस घाती सरकार ने हमेशा इनकी मांगों को नजरंदाज किया है। ऐसे में इस सरकार के राज में मुसीबत के मारे रेजिडेंट डॉक्टरों को नजरअंदाज किया जा रहा है। फिलहाल मांगों पर ध्यान आकृष्ट कराने के लिए सेंट्रल मार्ड संगठन के नेतृत्व में रेजिडेंट डॉक्टर अब ‘दादा’ (अजीत पवार) के दरबार में पहुंचे और मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है। ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने रेजिडेंट डॉक्टरों के हॉस्टलों की तुरंत मरम्मत करने का वादा किया था। लेकिन जेजे अस्पताल के हॉस्टल को छोड़कर किसी भी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टलों के लिए निधि वितरित नहीं की गई है। इसके साथ ही कइयों का मरम्मत कार्य शुरू तक नहीं किया गया है। साथ ही नए हॉस्टलों को भी अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसलिए रेजिडेंट डॉक्टरों के हॉस्टल अभी भी खराब स्थिति में हैं। नतीजतन डॉक्टरों को विषम परिस्थितियों में हॉस्टलों में रहना पड़ रहा है। इसी तरह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के पद कई महीनों से खाली हैं। इससे रेजिडेंट डॉक्टरों का शैक्षिक तौर पर नुकसान हो रहा है और इसका असर मरीजों की देखभाल पर पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को बेहतर सेवाएं मुहैया कराने के लिए सेंट्रल मार्ड संगठन के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत हेलगे के नेतृत्व में डॉक्टरों ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के सामने अपना दर्द व्यक्त किया और मांगों को तुरंत पूरा करने का अनुरोध किया है। साथ ही डॉक्टर ने अनुरोध किया कि रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए।

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