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घाती सरकार की एक और रेवड़ी सायन अस्पताल में १,२०० बेड का वादा!

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

सोनोग्राफी और डायलिसिस सुविधा बढ़ाने का पकड़ाया झुनझुना, मरीजों का सवाल, फिर भी क्या खत्म होगी अस्पताल की समस्याएं?

मुंबई मनपा के बड़े अस्पतालों की फेहरिस्त में शामिल सायन अस्पताल में कल अचानक मुख्यमंत्री ने दौरा किया। इस दौरे में उन्होंने अस्पताल में इलाज कराने के लिए आए बीमार मरीजों को ही रेवड़ी थमा दिया, जो अब तक तंदुरुस्त जनता में बांटी जा रही थी। उन्होंने वादों का पिटारा खोलते हुए कहा कि सायन अस्पताल में न केवल १,२०० बेड का प्रबंध किया जाएगा, बल्कि सोनोग्राफी और डायलिसिस की भी सुविधा बढ़ाई जाएगी। हालांकि, इस तरह झुनझुना पकड़ाए जाने के बाद मरीज सवाल करने लगे हैं कि कई असुविधाओं से जूझ रहे इस अस्पताल में बेड बढ़ाए जाने से क्या यहां मौजूद सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। फिलहाल, उनके इस सवाल का ठोस जवाब मनपा से लेकर घाती सरकार तक किसी के पास भी नहीं है।

उल्लेखनीय है कि सायन अस्पताल के आउट पेशेंट विभाग में रोजाना कम से कम साढ़े पांच हजार और सालाना करीब १९ लाख मरीज विभिन्न बीमारियों की जांच के लिए आते हैं। इसके साथ ही करीब ८०,००० मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में बेड की संख्या करीब १,९०० है, जिसे ३,२०० तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है, वहीं यहां के एक मेडिकल स्टॉफ का कहना है कि लापरवाही के चलते अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पेâल हो रही हैं। मनपा के प्रमुख अस्पतालों में से एक सायन अस्पताल भी मरीजों की देखभाल के दबाव का सामना कर रहा है। यह अस्पताल मुख्य सड़क पर होने के कारण कई जगहों से मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इन समस्याओं से जूझ रहे इस अस्पताल का मुआयना करने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री ने कल सुबह सात बजे ही दौरा किया। साथ ही वे ट्रामा आईसीयू, जनरल वॉर्ड, वॉर्ड क्रमांक चार में भी गए। इसके अलावा पब्लिसिटी पाने के लिए उन्होंने मरीजों से उनका हालचाल भी पूछा। इसके साथ ही अस्पताल के किचन में जाकर भोजन की गुणवत्ता को भी जानने की कोशिश की।

अस्पताल में बेड बढ़ाने का खोला पिटारा

मुख्यमंत्री ने सायन अस्पताल में बेड बढ़ाने का पिटारा खोलते हुए कहा कि यहां २०० बेड की गहन चिकित्सा इकाई और १,००० बेड के जनरल वॉर्ड का काम चल रहा है, जो जल्द ही पूरा हो जाएगा। इससे १,२०० नए बेड उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही अस्पताल में बन रही इमारत के काम में तेजी लाने, जीरो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी लागू करने के साथ ही सोनोग्राफी और डायलिसिस समेत अन्य सुविधाओं को बढ़ाने का निर्देश देते हुए एक तरह से झुनझुना पकड़ाने का काम किया है।

मरीजों की रहती है लंबी कतारें

गरीबों के लिए निजी अस्पतालों में इलाज कराना पहुंच से बाहर होता जा रहा है। ऐसे में लाखों मरीजों के पास मनपा के विभिन्न अस्पतालों के साथ ही सायन अस्पताल के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। दूसरी तरफ मनपा अपने अस्पतालों में मरीजों को सुविधाएं देने में विफल रही है। आलम यह है कि केस पेपर निकालने से लेकर मेडिकल चेकअप, ब्लड टेस्ट के लिए लंबी मरीजों की कतारें लगी रहती हैं।

मरीजों का सवाल कब तक मिलती रहेगी तारीख पर तारीख

मरीजों का कहना है कि मुख्यमंत्री के औचक दौरे से अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया। ऐसे में कुछ दिनों तक कामकाज सही से चलेगा, लेकिन समय बीतने के साथ ही फिर से पुराने ढर्रे पर कामकाज शुरू हो जाएगा। उनका कहना है कि डॉक्टर उन्हें कुछ टेस्ट कराने के लिए कहते हैं। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का पता लगता है और उसके इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है। हालांकि, एमआरआई, सीटी स्वैâन, एक्स-रे, सोनोग्राफी समेत कई सारे ऐसे टेस्ट होते हैं, जिसकी जांच के लिए २० से २५ दिन के बाद की तारीख मिलती है। इस स्थिति में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं, ऐसे में मनपा अस्पतालों में कब तक तारीख पर तारीख मिलती रहेगी।

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