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‘घाती’ सरकार की है मेहरबानी… महाराष्ट्र में ९.५० लाख बच्चे बीमार

– ‘जागरूक पालक, सुदृढ़ बालक’ अभियान सर्वे ने खोली पोल

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में एक ओर जहां हवा की गुणवत्ता में गिरावट का असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पाए जा रहे हैं। इसका पोल घाती सरकार द्वारा ‘जागरूक पालक, सुदृढ़ बालक’ अभियान के तहत किए गए सर्वे में खुला है। आंकड़ों के मुताबिक, घाती सरकार की मेहरबानी से महाराष्ट्र में शून्य से १८ वर्ष की आयु के ९,६४,३८४ बच्चे विभिन्न बीमारियों से पीड़ित पाए गए हैं।
महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने ९ फरवरी २०२३ से ‘जागरूक पालक, सुदृढ़ बालक’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत अब तक ९६,७३७ स्कूलों और १,१०,४७३ आंगनबाड़ियों में २,४९,५४,२५७ बच्चों की जांच की जा चुकी है। इस स्वास्थ्य परीक्षण में यह बात सामने आई है कि राज्य में साढ़े नौ लाख से ज्यादा बच्चे बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग के तहत राज्य के शून्य से ६ वर्ष तक के ७३,०४,०८२ बच्चों की जांच की गई। इनमें से १३,९०५ बच्चों में जन्मजात दोष पाया गया है। इन बच्चों में से ५१३ में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, ५०० बच्चों में डाउन सिंड्रोम, १,२०७ बच्चों में कटे होंठ-कटे तालु, ८३३ बच्चों में क्लब फुट, ३८७ बच्चों में जन्मजात मोतियाबिंद, १,७९६ में जन्मजात बहरापन, ५,२५१ बच्चों में जन्मजात हृदय दोष और ३,०८१ बच्चे अन्य जन्मजात दोषों से ग्रस्त हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में १२,३८८ बच्चों का इलाज शुरू है। चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘जागरूक पालक, सुदृढ़ बालक’ अभियान के तहत ६ से १० साल की उम्र के ६,५९,०५१ और १० से १८ वर्ष तक के १,१०,६०,११६ बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
१,७६,९६२ बच्चों में विटामिन की कमी
बता दें कि यदि बच्चों को पर्याप्त और आवश्यक विटामिन नहीं मिलती है तो उनमें कई महत्वपूर्ण विटामिनों की कमी पाई जाती है। इस सर्वे में राज्य में १,७६,९६२ बच्चों में महत्वपूर्ण विटामिन की कमी पाई गई है। विटामिन की कमी के कारण एनीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। बताया गया है कि ६२,९२४ बच्चे एनीमिया से ग्रसित पाए गए हैं तो ७,४३१ बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा ८,१२० बच्चे मोटापे, १,००७ बच्चे घेंघा रोग और ९५,०९४ बच्चे अन्य अनुवांशिक कमियों से ग्रस्त हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि स्वास्थ्य परीक्षण में बच्चों की बीमारियों का पता चलने पर १,६६,९४२ बच्चों का इलाज किया गया है।
४० हजार से ज्यादा बच्चों में दृष्टि दोष
स्वास्थ्य अभियान में जांच के दौरान पाया गया कि ६२,९२४ बच्चों में चर्म रोग पाया गया है। इसके बाद ८,२२८ बच्चों में ओटिटिस मीडिया पाया गया है। इसी तरह १,६३२ बच्चों को ह्यूमैटिक हृदय रोग है। अस्थमा से पीड़ित बच्चों की संख्या ५,०२७ है। १५,९७१ बच्चों में भेंगापन पाया गया है। नेत्र संबंधी अन्य बीमारियों से ग्रस्त बच्चों की संख्या २५,५३० है। इसके साथ ही ४,०२३ बच्चे दृष्टिबाधित हैं, जबकि १,४०,१०४ बच्चों में दांतों की समस्या पाई गई है। बाल्यावस्था-कुष्ठ से ३०४, टीबी से ४३१ और कैंसर से ३७२ बच्चे पीड़ित पाए गए, जबकि अन्य बीमारियों से ग्रस्त बच्चों की संख्या २८०९४७ है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कुल ७,३४,९०८ बच्चों में से ६,९३,०१० बच्चों का इलाज किया जा चुका है।
विकासात्मक विलंब से जूझते मिले २४,५४७ बच्चे
विकासात्मक विलंब से २४,५४७ बच्चे जूझते हुए मिले। इस सर्वे में पाया गया कि ऑटिज्म से पीड़ित ११७६, एडीएचडी से ६६३, सेरेब्रल पाल्सी से ६०७ और अन्य बीमारियों से ग्रस्त २१,६२५ बच्चे पीड़ित पाए गए हैं। इनमें से २१,८४७ बच्चों का इलाज किया जा चुका है। साथ ही अन्य बीमारियों से ग्रसित किशोरों और बच्चों की संख्या १४ हजार ६२ है। इसके लिए अब तक ४३,०७७ शिविर लगाए जा चुके हैं। साथ ही १३,०७१ बच्चों को सर्जरी के लिए रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इनमें से ११,४१२ सर्जरी की गर्इं।

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