मुख्यपृष्ठनए समाचार‘घाती’ तेरे राज में, गांव बिक रहा बाजार में!

‘घाती’ तेरे राज में, गांव बिक रहा बाजार में!

रामदिनेश यादव / मंबई

 भ्रष्टाचार से त्रस्त लोगों ने बिक्री के लिए लगाए पोस्टर बैनर
 बीड जिले के इस गांव की कुल आबादी है १,८००

महाराष्ट्र में जब से ‘घाती’ सरकार आई है, तब से यहां भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकार के कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लग चुका है। भ्रष्टाचार के चलते अब आम जनता सरकार से त्रस्त होने लगी है। सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार का सीधा असर अब गांव- देहात में भी पड़ने लगा है। यही वजह है कि बीड़ जिले के एक गांव ने तो भ्रष्टाचार से तंग आकर खुद को बाजार में बेचने का एलान किया है। इसके लिए गांव वालों ने पोस्टर-वीडियो भी जारी कर दिया है।

लेटर में लिखा है…

माननीय, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सप्रेम नमस्कार,
महाराष्ट्र राज्य के विकास का पता नहीं, लेकिन इस गांव से विकास कोसों दूर है। यहां जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। कई बार संबंधित प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इसलिए हमें हमारा गांव बेचना पड़ेगा। कृपया हमें अपना गांव बेचने की अनुमति दें…

बता दें कि इस गांव में पहले से ही कोई बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं और अब फर्जी बिलों, भ्रष्टाचार से नाराज ग्रामीणों ने गांव को बेचने की पेशकश कर दी है। इस वजह से यह गांव अब चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके चलते ‘घाती’ सरकार की जमकर बदनामी हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीड जिले के पटोदा तालुका के खडकवाड़ी गांव में रहने वाले ग्रामीणों ने एक बैनर लगाया है, जिसमें लिखा है कि यह गांव बिकाऊ है। गांव में सुविधाएं नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम बैनर लगाकर गांव बेचने की इजाजत मांगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुल १,८०० की आबादी वाले इस गांव में सरकार की कई योजनाएं कागज पर ही बन गई हैं। ऐसे में गांव को बेचने का बैनर लगाने से इस गांव की चर्चा राज्य भर में हो रही है। गांव वालों ने योजनाओं के दस्तावेज दिखाकर वहां बनने वाली तमाम विकास योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार होने का खुलासा किया है। भ्रष्टाचार से तंग गांव वालों ने ‘गांव बिकाऊ है’ लिखे पोस्टर लगा दिए गए हैं। ग्रामीणों ने असंवैधानिक मुख्यमंत्री शिंदे से भी इसकी अनुमति देने का अनुरोध किया है।
यहां गांव की दलित बस्ती में सीमेंट रोड के काम के लिए पिछले साल ४ लाख ९० हजार रुपए की निधि स्वीकृत की गई थी, लेकिन सीमेंट सड़क नहीं बनी और निधि का गबन भी हो गया। पैसा होते हुए गांव में सुविधाओं का अभाव है।

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