" /> घाव…. रिश्तों की उलझन… बीमा के पैसों के लालच में भाई बना कसाई

घाव…. रिश्तों की उलझन… बीमा के पैसों के लालच में भाई बना कसाई

लालच में इंसान कभी-कभी हैवान बन जाता है। वह रिश्तों के महत्व को नजरअंदाज कर देता है। ऐसे में कभी-कभी लोग अपनों का कत्ल करने से भीr परहेज नहीं करते हैं। हाल ही में रिश्तों की उलझन की ऐसी ही एक खबर मध्यप्रदेश के विदीशा जिले से सामने आई थी, जिसमें एक वर्षीय युवक की हत्या उसके अपनों ने ही कर दी थी। हत्या करनेवाला कोई और नहीं बल्कि मृत्क का अपना बड़ा भाई तथा बहन की बेटी थी। भाई और भांजी द्वारा किए गए इस कत्ल में दोनों कातिलों का कत्ल के पीछे अपना-अपना स्वार्थ था लेकिन की वजह पैसा ही थी।

मध्य प्रदेश के चिकलोद में जंगल में ९ जनवरी को एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो मृतक की शिनाख्त विदिशा निवासी ३२ साल के अखिलेश किरार के रूप में हुई। अखिलेश की हत्या के कारणों की जांच कर रही पुलिस ने ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया, जिससे लोग भी सकते में आ गए।
बड़ा भाई निकला मुख्य हत्यारा
आमतौर पर हमारे देश में बड़े भाई को पिता के समान माना जाता है लेकिन अखिलेश का बड़ा भाई दरिंदा निकला। जांच में पाया गया कि अखिलेश की हत्या उसी के बड़े भाई धीरज किरार ने की थी और इस कुकर्म में अखिलेश की भांजी (बहन की बेटी) शैलजा ने बड़े मामा (धीरज) का साथ दिया था।
बीमा के पैसों के लिए हुई हत्या
पुलिसीया जांच में पता चला कि धीरज के साथ अखिलेश डेयरी का कारोबार करता था। धीरज ने बीमा की रकम पाने के लिए अपने छोटे भाई अखिलेश की हत्या की थी। दरअसल, अखिलेश ने एक करोड़ रुपए की बीमा पॉलीसी ले रखी थी। उसी पॉलीसी का पैसा पाने के लिए धीरज ने अखिलेश के हत्या की साजिश रची थी। उसने पैसों का लालच देकर अपनी २३ वर्षीय भांजी शैलजा को भीr अपने साथ मिला लिया। अखिलेश की हत्या में साथ देने के बदले धीरज ने शैलजा को बीमा राशि में हिस्सा देने का लालच दिया था। हत्या के बाद शैलजा अपने हिस्से का पैसा लेकर मुंबई जाना चाहती थी। मुंबई में वह बॉलीवुड अभिनेत्री बनना चाहती थी।
योजना के तहत ९ जनवरी को भोर में ४.३० बजे धीरज अपने छोटे भाई अखिलेश को भोपाल चलने के बहाने कार से रायसेन जिला के चिकलोद बनछोड़ स्थित जंगल में ले गया और वहां मूसल से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को जंगल में छोड़कर वह फरार हो गया था। उसने सबूत मिटाने के लिए कपड़े मूसल को नदी में फेंक कर धीरज मौके से फरार हो गए। धीरज ने सोचा था कि अखिलेश के शव को जानवर खा जाएंगे।
धीरज ने सोचा था कि हत्या के कुछ दिन बाद वह गुमशुदा अखिलेश को मृत घोषित कर देगा और फिर बीमा राशि हासिल कर लेगा। लेकिन पुलिस के प्रयासों से उसके मंसूबों पर पानी फिर गया। पुलिस ने जब अखिलेश के परिजनों से पूछताछ की गई तो धीरज ज्यादा देर टिक नहीं पाया। उसने अखिलेश की हत्या का जुर्म करना स्वीकार कर लिया। अखिलेश अविवाहित था, जबकि धीरज के दो छोटे बच्चे हैं। अपने बच्चों का भविष्य संवारने के स्वार्थ में उसने पुत्र समान छोटे भाई की बेरहमी से हत्या कर दी थी।