" /> घाव…४८ घंटों का टेंशन… विवाह से पहले चोरी हुए गहने

घाव…४८ घंटों का टेंशन… विवाह से पहले चोरी हुए गहने

आज लोगों के घर में किसी के विवाह की तैयारी होती है या कोई सदस्य बेहद बीमार हो जाता है तो पैसों का जुगाड़ करना सबसे बड़ी समस्या होती है। उस समस्या से निपटने के लिए परिवार के लोग खासकर मुखिया पाई-पाई जोड़ने और उस कार्य को संपन्न कराने को प्रयास करते हैं। यदि ऐसे किसी कार्य के लिए जुटाई गई रकम ऐन मौके पर कोई चुरा ले तो उस परिवार के मुखिया पर क्या गुजरेगी? इसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप उठती है। मालाड निवासी एक गृहस्थ के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था। बेटों के विवाह के लिए गहने खरीदकर वे लोकल ट्रेन से घर लौट रहे थे तभी किसी ने उनके हाथ से गहनोंवाला बैग रहस्यमयी ढंग से उड़ा लिया था। इस घटना के बाद उक्त गृहस्थ को करीब ४८ घंटे बेहद तनाव का सामना करना पड़ा। उन्हें तनाव से मुक्ति तभी मिली जब रेलवे पुलिस ने जादूगर ठगों को अपना कमाल दिखाया।

व्यस्त बाजारों व खासकर रेलवे स्टेशनों के आसपास कई चोर, जेबकतरे व लुटेरे मौजूद रहते हैं, जिनका मुख्य लक्ष्य होता है लोगों की नकदी, गहने आदि पर हाथ साफ करना। मालाड के एक ६३ वर्षीय गृहस्थ ऐसे कुख्यात लुटेरों के गिरोह का शिकार बन गए थे। २३ फरवरी को वो राकेश शाह (बदला हुआ नाम) बेटों के विवाह के लिए दक्षिण मुंबई स्थित मुंबा देवी से गहने लेकर लौट रहे थे। राकेश शाह, मालाड स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर ओवर ब्रिज से घर की ओर जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर बेहद शातिराना अंदाज में गहनों का बैग उनके हाथ से उड़ा लिया था।
‘जादूगर’ गैंग ने बनाया था शिकार
राकेश शाह ने बोरीवली रेलवे पुलिस थाने में लूट की शिकायत दर्ज कराई थी। रेलवे पुलिस क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शैलेंद्र धीवार के मार्गदर्शन व पीआई शहाजी निकम के नेतृत्व में एपीआई हेमराज साठे की टीम ने मामले की जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेजों से एसटीएफ की टीम को ये पता चल गया कि इस वारदात को जादूगर गैंग के सरगना बबलू अहमद इस्माइल शेख ने अपने गुर्गों की मदद से अंजाम दिया था।
‘हल्दीवाली दुल्हन’ की तलाश 
एपीआई साठे ने बताया कि जादूगर गैंग के लोग भीड़ में अपना शिकार ढूंढ़ते हैं। शिकार नजर आने पर उनका मुखिया कहता है कि ‘हल्दीवाली दुल्हन आ गई है।’ यह बाकी सदस्यों के लिए संकेत होता था। वो सभी शिकार को घेरकर चलने लगते थे। मौका देखकर मुखिया जब कहता था, ‘चामर छप्पर लगा।’ तब उनका एक साथी शिकार को अपने बैग या बड़े झोले की ओट में छिपा लेता था और फिर अगला निर्देश ‘मशीन’ (माल उड़ानेवाले) को ‘सौदा’ पूरा करे यानी माल उड़ा ले।
पुलिस का जादू पड़ा जादूगरों पर भारी
बबलू एक पेशेवर अपराधी था और वह इसी तरह पहले भी कई वारदातों को अंजाम दे चुका था। उसके खिलाफ एलटी मार्ग, मालाड, कापूर बावड़ी, राबोड़ी, विरार व सीएसटीएम रेलवे पुलिस थाने में पहले से ही मामले दर्ज थे। इसलिए बबलू का पता पुलिस के रिकॉर्ड में पहले से ही मौजूद था लेकिन एसटीएफ की टीम जब बबलू को पकड़ने नालासोपारा स्थित उसके घर गई तो वह वहां नहीं मिला। एसटीएफ की टीम ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। चोरी का माल लुटेरे कहीं तो बेचेंगे ही। यह सोचकर टीम ने सोनारों से संपर्क करना शुरू किया। इसी दौरान एसटीएफ की टीम को पता चला कि बबलू और उसके साथियों ने एक सोनार से संपर्क किया था। उक्त सूचना के बाद एसटीएफ की टीम ने पालघर जिले के उक्त सोनार की दुकान के आसपास अपना जाल बिछा दिया और जैसे ही बबलू अपने साथी नहीम नसीर शेख के साथ गहने बेचने पहुंचा, टीम ने उसे दबोच लिया। टीम ने आरोपियों से १,९१,७०० रुपए के गहने भी बरामद कर लिए।