गजल : मोहब्बत

मोहब्बत में कभी ना इस तरह बीमार हो जाना
जमाना बीच में आए तो बस तलवार हो जाना
मजा आता मोहब्बत में तभी दो दिल जो मिलते हैं
कभी इकरार कर लेना कभी तकरार हो जाना
जो गुरबत पर कभी पर्दा उठाने की करें कोशिश
बचाना जीस्त की इज्जत भले हथियार हो जाना
कभी मां के गिरे आंसू तो उनको पोंछ देना तुम
झुलाना सुख के झूलों में कि खुद मनुहार हो जाना
अनाथों को सबा देना गरीबों पर दया करना
कि बेघर हो ‘कनक’ कोई तो तुम परिवार हो जाना।
-डॉ. कनक लता तिवारी

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