मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनागजल : मिरी आशिकी ही मिरी पहचान है

गजल : मिरी आशिकी ही मिरी पहचान है

चंद अश’आर
मिरी आशिकी ही मिरी पहचान है।
तेरे दिल में बस्ती मिरी जान है ।।
समझ रहे थे जिसे गहरी चोट सब।
वो तो तिरी चाहत का निशान है।।
गमजदा होकर तिरे दर से लौट आए हैं।
हमारा हाल देखकर लोग भी हैरान हैं।।
तिरे सामने रहते हैं सारा दिन हम तो
हमीं को छोड़कर सभी पे तिरा ध्यान है।।
`काजी’ तिरी बात पर यकीं कर लिया सबने।
दिल को लगता है… गलत तिरा बयान है।।
-डॉ. वासिफ काजी,`काजकीकलम’, इंदौर

अन्य समाचार