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गिरीश बापट ने भाजपाइयों को दिखाया आईना: सत्ता की खातिर दांव पर लगाई जा रही पार्टी की निष्ठा!

सामना संवाददाता/ पुणे
शिवसेना से बगावत कर बागी विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बना ली है। इसे लेकर भाजपा का एक खेमा बेहद नाराज है। भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरीश बापट ने नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया है कि सत्ता की खातिर पार्टी की निष्ठा और विचार दांव पर लगाए जा रहे हैं।
पुणे में अपने जन्मदिन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद बापट का दर्द छलका। उन्होंने कहा कि सत्ता पाने के लिए किसी को भी पार्टी में प्रवेश दिया जाता है। भाजपा भी सत्ता के गणित जोड़ रही है। इससे निष्कर्ष बदल गए हैं। पार्टी के प्रति सच्ची निष्ठा रखनेवाले अब वफादार कार्यकर्ता नहीं रहे। इन सब बातों को लेकर मैं नाराज हूं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मैं भाजपा ही नहीं, बल्कि सभी पार्टियों से नाराज हूं। राजनीति में अब सत्ता अथवा सत्ता में पद प्राप्त करना ही एकमात्र लक्ष्य कार्यकर्ताओं का रह गया है। छोटे-छोटे काम करके गरीबों के चेहरे पर संतुष्टि देखना जरूरी है। लेकिन अब हर कोई नगरसेवक, विधायक, मंत्री और सांसद बनना चाहता है।
कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर खींचतान जारी है।‌ कार्यकर्ता पार्टी की आत्मा होते हैं। कार्यकर्ता ही नहीं तो पार्टी कैसे टिकेगी? लेकिन अब कार्यकर्ताओं को पैसा देकर जुटाना पड़ता है। भोजन की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। राजनीति का स्तर गिर गया है। कार्यकर्ताओं के पास वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं रही।

दस साल से पहले न दिया जाए कोई पद
बापट ने कहा कि कार्यकर्ता सिर्फ नेताओं, मंत्रियों को माला पहनाते समय तस्वीरें लेने और तख्तियां लगाने में खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं। यह बात शोभा नहीं देती। किसी भी पार्टी में कार्यकर्ता को तब तक कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए जब तक कि उसने कम-से-कम दस साल तक पार्टी संगठन में काम नहीं किया हो। अगर सभी पार्टियां ऐसा करती हैं, तभी राजनीति के स्तर को बचाया जा सकता है।
बदल गए हैं मानदंड
बापट ने अफसोस जताते हुए कहा कि अब चुनाव जीतने के लिए शराबियों से भी संपर्क किया जा रहा है। मेरे जैसे पुराने कार्यकर्ताओं को इस तरह की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं होती। इस बारे में किसी को तो बोलना चाहिए। भाजपा भी सत्ता चाहती है। सत्ता की राजनीतिक गणना इस बात को ध्यान में रखकर की जा रही है कि इसे टिकट दिया तो चुनाव नहीं जीतेगा, दूसरा चुनाव जीत जाएगा। पहले चुनाव में जमानत जब्त हुई फिर भी चलता था। अब सत्ता की खातिर किसी को भी पार्टी में शामिल कर लिया जाता है इसलिए मानदंड भी बदल गए हैं।

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