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अपना दिल मुझे दे दो! … मुंबई में ४५ लोगों को है हृदय प्रत्यारोपण का इंतजार

• चिकित्सकों ने दी है गंभीरता से खयाल रखने की सलाह
• हृदय और ब्‍लड प्रेशर की कराते रहें नियमित जांच
सामना संवाददाता / मुंबई
उम्रदराज लोगों को हृदय रोग की बीमारी अब बीते समय की बात हो चुकी है। आज आलम यह है कि बेहद छोटी उम्र के नौजवानों को हृदय से संबंधित बीमारियां हो रही हैं, वहीं मुंबई जैसे शहरों में दिनचर्या और खान-पान के चलते लोगों के नाजुक दिल और बेहाल हो रहे हैं। अस्पतालों में दिल के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हालात ये हो गए हैं कि मरीजों को दिल की जरूरत पड़ रही है तो उनको दिल नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान समय में मुंबई में रहनेवाले मरीजों पर नजर डालें तो ४५ व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्हें हृदय प्रत्यारोपण का इंतजार है और वे अपना दिल मुझे दे दो की गुजारिश लोगों से कर रहे हैं। हृदय रोग की बढ़ती बीमारियों को लेकर हृदय रोग विशेषज्ञों की यही सलाह है कि इसका गंभीरता से खयाल रखें। साथ ही सभी को समय-समय पर अपने हृदय और ब्‍लड प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मुंबई जैसे महानगरों में भाग-दौड़ और व्यस्तता भरी जीवनशैली के साथ ही अनहेल्दी फूड खाने की आदतों के चलते जिन रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, उनमें से एक हार्ट अटैक भी है। आमतौर पर दिल की बीमारियों को उम्र बढ़ने के साथ होनेवाली समस्या माना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में कम उम्र के लोग भी इस गंभीर बीमारी का तेजी से शिकार होते जा रहे हैं। दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में लोगों की जान जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में साल २०१९ में हार्ट अटैक से ५,८४९, साल २०२० में ५,६३३ और साल २०२१ में १७,८८० लोगों की मौतें हो चुकी हैं।
कम हैं दिल प्रत्यारोपण के मामले
मुंबई में ४५ लोगों को नए दिल की जरूरत है, जिसमें से १८ साल से कम ७ और १८ साल से अधिक ३८ रोगी शामिल हैं, जिनका हार्ट ट्रांसप्लांट करना जरूरी है। हालांकि बीते ७ वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक हृदय प्रत्यारोपण के मामले घटते ही जा रहे हैं। साल २०१६ में ३४, साल २०१७ में ४१, साल २०१८ में २३, साल २०१९ में २१, साल २०२० में ११, साल २०२१ में २० और साल २०२२ में अब तक १९ हार्ट ट्रांसप्लांट हुए हैं।

बनाई गई अनूठी मानव शृंखला
कल राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस के अवसर पर अंग दाताओं के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट से दूसरा जीवन पानेवालों ने एक अनूठी मानव हृदय शृंखला बनाई।

अस्पताल में हुए हैं १५० से अधिक हार्ट ट्रांसप्लांट
डॉ. अन्वय मुले ने बताया कि अस्पताल में अब तक १५० से अधिक सफल हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी की जा चुकी है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुंबई निवासी ६० वर्षीय अनिरुद्ध नैंसी ने अपने हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद एक वर्ष से भी कम समय में राज्य स्तरीय स्विमिंग चैंपियनशिप-२०२२ में जीत हासिल की। वह २०१९ से कार्डियोमायोपैथी से पीड़ित थे।

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