छोड़ दें

शिकारी इधर भी आ निकले हैं
परिंदों से कहो ये इमारत छोड़ दें
साफगोई एक हद तक अच्छी
लेकिन हर बात सच?
लोगों से कहो ये आदत छोड़ दें
रोज़ों से परहेज़, इफतार को आ बैठे
दोस्तों से कहो ये इबादत छोड़ दें
पहले दंगे, फिर मुल्क़ में राहतों के ऐलान
नेताओं से कहो ये सियासत छोड़ दें
डाॅ. रवीन्द्र कुमार

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