मुख्यपृष्ठखबरेंस्वास्थ्य पर पड़ रहा है जलवायु परिवर्तन का असर!

स्वास्थ्य पर पड़ रहा है जलवायु परिवर्तन का असर!

पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की है खास नजर
मुंबई आईआईटी ने जारी रखा है अनुसंधान
सामना संवाददाता / मुंबई। मुंबई में जलवायु परिवर्तन के चलते अत्यधिक वर्षा और समुद्र का तेज गति से बढ़ रहा जलस्तर सबसे बड़ी चुनौती है। इन चुनौतियों पर पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के मार्गदर्शन में उनका मंत्रालय खास तौर पर नजर रखते हुए इससे निपटने के तरीकों को बारीकी से तलाश रहा है, ताकि भविष्य में स्वास्थ्य की दृष्टि से मुंबई के कठिन डगर को आसान बनाया जा सके। फिलहाल इसे लेकर मुंबई आईआईटी ने अपना अनुसंधान काफी समय से जारी रखे हुए है।
विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में भी जलवायु परिवर्तन से मुंबई जूझ रही है। इसके चलते मुंबईकरों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। मुंबई आईआईटी के क्लाइमेट स्टडीज के प्रोफेसर सुबिमल घोष के मुताबिक बीते कई सालों से बारिश का स्तर बढ़ गया है। इसका असर समुद्री किनारों पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं परिवर्तित जलवायु नागरिकों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही है।
उन्होंने संभावना जताते हुए कहा है कि भविष्य में यह संकट और गहराने वाला है। लेफ्टीनेंट जनरल पीजी कामथ ने हिंदुस्थान-पाक और हिंदुस्थान-चीन में जलसंपदा की परिस्थितियों का विश्लेषण किया है। वहीं चीन और हिंदुस्थान के राजदूत के तौर पर काम करनेवाले गौतम बंबावाले ने जल लाभांश पर जानकारी दी है। इसी तरह शिरपुर पैटर्न के अग्रणी और प्रख्यात भूविज्ञानी सुरेश खानापुरकर ने भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण की सफलता के बारे में बताया है। पुणे के वैज्ञानिक उपेंद्र ढोंडे ने देश पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों विशेष रूप से मुंबई और तटीय जल पर होनेवाले असर की जानकारी दी है।
कहीं अधिक तो कहीं कम होती है बारिश
प्रोफेसर घोष ने कहा कि मुंबई के कई क्षेत्रों में बारिश का स्तर अधिक है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन प्रमुख कारण है, वहीं कुछ क्षेत्रों में कम वर्षा होती है। नतीजतन शहर और उपनगर में बारिश के पानी का पुन: उपयोग नहीं किया जा सकता है।
१० वर्षों से शुरू है शोध
आईआईटी मुंबई में जलवायु परिवर्तन को लेकर बीते दस सालों से शोध शुरू है। शोध की रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक भेजी जाती है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रशासन रणनीतिक कार्य योजना तैयार कर उस पर अमल करते हैं।
१० वर्षों से शुरू है शोध
आईआईटी मुंबई में जलवायु परिवर्तन को लेकर बीते दस सालों से शोध शुरू है। शोध की रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक भेजी जाती है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रशासन रणनीतिक कार्य योजना तैयार कर उस पर अमल करते हैं।

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