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गोल्ड गायब! … शादियों में सोने की खपत हुई कम

 सरकारी शुल्क नीति से खरीददार पीछे हटे
देश में शादियों का सीजन आ गया है। शादियों का मौसम आते ही सबसे ज्यादा मांग जिस चीज की होती है वह है सोना। हर बाप का सपना होता है कि वह अपनी बेटी-बहू को अपनी हैसियत के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा गहने दे। इसके अलावा नाते-रिश्तेदार भी तोहफे में आभूषण देते हैं। इससे सोने-चांदी की मांग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। आज भी देश में सोने का उत्पादन काफी कम होता है। यही कारण है कि हिंदुस्थान में अप्रâीका व अन्य देशों से सोने का आयात किया जाता है। मगर मोदी सरकार ने शादियों के भी इस सीजन से भी पैसा कमाने का जुगाड़ कर लिया है। उसने सोने के सिक्के पर टैक्स तो बढ़ा ही दिया है, साथ ही आयात होनेवाले सोने-चांदी के सिक्कों पर आयात शुल्क में १५ फीसदी की बढ़ोतरी भी कर दी है। ऐसे में आम आदमी की शादी में गोल्ड के गायब होने का अंदेशा बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि इससे शादियों में सोने की खपत कम हो जाएगी, क्योंकि सरकारी शुल्क नीति से खरीददार पीछे हट जाएंगे।
हाल ही में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि कीमती धातुओं वाले प्रयुक्त उत्प्रेरकों पर भी आयात शुल्क बढ़ाया गया है। अब इस पर ४.३५ फीसदी ‘कृषि अवसंरचना विकास उपकर’ लगाया गया है। कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को सर्राफा के बराबर लाने के उद्देश्य से १० प्रतिशत के मूल सीमा शुल्क के अतिरिक्त उपकर लगाया गया है। सोने या चांदी के ‘फाइंडिग्स’ का मतलब हुक, क्लैंप, पिन या स्क्रू बैक जैसे छोटे उत्पादों से है, जिसका उपयोग आभूषण के पूरे टुकड़े या उसके एक हिस्से को आपस में जोड़ने या थामने के लिए किया जाता है। केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया, अतिरिक्त शुल्क २२ जनवरी से अमल में आ गया है। सरकार ने २०२१-२२ के बजट में कृषि अवसंरचना के वित्तपोषण के लिए कुछ उत्पादों पर उपकर लगाने का प्रस्ताव किया था।

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