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सोना मुंडा!

वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतनेवाले पहले भारतीय एथलीट बने नीरज आखिरकार, हरियाणा के मुंडे नीरज चोपड़ा ने अपना और देश का सपना पूरा कर दिया। उन्होंने इतिहास रचते हुए `सोना’ जीत लिया। नीरज चोपड़ा ने बुडापेस्ट में चल रही वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने दूसरे राउंड में ८८.१७ मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। इसी के साथ वे वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। नीरज चोपड़ा की इस उपलब्धि पर उन्हें देशभर से बधाइयां मिल रही हैं।
भारतीय दिग्गज जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने इतिहास रचते हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। वहीं पाकिस्तानी एथलीट को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इस तरह नीरज वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतनेवाले पहले भारतीय बन गए हैं। हालांकि, नीरज चोपड़ा के लिए आगाज अच्छा नहीं रहा। भारतीय दिग्गज पहले प्रयास के बाद १२वें नंबर पर थे। दरअसल, नीरज चोपड़ा का थ्रो अमान्य करार कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद नीरज चोपड़ा ने गजब की वापसी की। बता दें कि नीरज चोपड़ा दूसरे राउंड के बाद ८८.१७ मीटर के साथ टॉप पर काबिज हो गए। वहीं जर्मनी के जुलियन वेबर दूसरे राउंड में ८५.७९ मीटर भाला फेंककर दूसरे पर आ गए। जबकि इस राउंड के बाद चेक रिपब्लिक के जैकब वादलेच ८४.१८ मीटर के स्कोर के साथ तीसरे नंबर पर रहे। भारतीय दिग्गज ने तीसरे राउंड में ८६.३२ मीटर डिस्टेंस निकाला। वहीं इस राउंड के बाद पाकिस्तान के अरशद नदीम ८७.८२ स्कोर के साथ दूसरे नंबर पर आ गए। पाकिस्तान के अरशद नदीम को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इससे पहले नीरज चोपड़ा ओलंपिक के अलावा डायमंड लीग में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

पैसे नहीं थे लेकिन हौसला नहीं खोया
हरियाणा में पानीपत के गांव खंदरा के रहनेवाले एथलीट नीरज चोपड़ा आज भी संयुक्त परिवार में रहते हैं। चोपड़ा का जन्म २४ दिसंबर, १९९७ को सतीश कुमार और सरोज देवी के घर हुआ। नीरज के परिजन साधारण किसान हैं। नीरज के पिता खेती करते हैं, वहीं उनकी माता गृहिणी हैं। नीरज के पिता चार भाई हैं और उनका संयुक्त परिवार है। घर में परिवार के सभी १७ सदस्यों के लिए आज भी एक ही चूल्हे पर खाना बनता है। नीरज के पिता व तीनों चाचा खेती करके अपने संयुक्त परिवार को पाल रहे हैं। नीरज की कक्षा नौ तक की शिक्षा खंदरा के पास स्थित गांव भालसी में भारतीय विद्या निकेतन स्कूल में हुई। इसके बाद नीरज ने कक्षा १० से लेकर १२ तक की पढ़ाई ओपन स्कूल से की। नीरज चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से पासआउट हुए हैं। मौजूदा समय में वे आर्मी में सूबेदार के पद पर नौकरी कर रहे हैं। जेवलिन थ्रोअर बनने की तैयारियां करते हुए एक दौर ऐसा भी आया जब नीरज के पास जेवलिन खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। अच्छी जेवलिन की कीमत डेढ़ लाख रुपए थी, पर नीरज ने हौसला नहीं खोया। पिता सतीश कुमार व चाचा भीम सिंह चोपड़ा से सात हजार रुपए लेकर सस्ता जेवलिन खरीदा और हर दिन आठ घंटे अभ्यास किया।

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