मुख्यपृष्ठधर्म विशेषअखंड होगा सौभाग्य! ... शिव-पार्वती का मिलेगा आशीष

अखंड होगा सौभाग्य! … शिव-पार्वती का मिलेगा आशीष

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या या श्रावणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में सावन माह की अमावस्या तिथि को विशेष तिथि माना जाता है। श्रावण का महीना भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है और इस माह में पड़ने वाली अमावस्या इस वजह से और भी विशेष हो जाती है। मान्यता है कि इस दिन पितरों को पिंडदान, श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा हरियाली अमावस्या के दिन पर्यावरण की भी विशेष महत्ता है। इस दिन नए वृक्षों का रोपण भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रावणी अमावस्या के दिन वृक्षारोपण करने से जीवन के सारे कष्ट दोष दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
धार्मिक महत्व
नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास में महादेव के पूजन का विशेष महत्व है। हरियाली अमावस्या पर विशेष तौर पर शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। कुंवारी कन्याएं इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करती हैं तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इसके अलावा सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्पदोष, पितृदोष और शनि का प्रकोप हो तो हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, पंचामृत या रुद्राभिषेक करने से लाभ होता है। इस दिन शाम के समय नदी के किनारे या मंदिर में दीप दान करने का भी विधान है। श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान एवं वृक्षारोपण आदि शुभ कार्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके भगवान शिव और पार्वती की पूजा करनी चाहिए। सुहागन महिलाओं को माता पार्वती की पूजा करने के बाद सुहाग सामग्री बांटनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन जो भी महिला सुहाग सबंधी सामग्री जैसे हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी बांटती है उनके सुहाग की आयु लंबी होती है और घर में खुशहाली बनी रहती है। हरियाली अमावस्या के दिन पीपल और तुलसी के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और प्रसाद में मालपुआ का भोग लगाना चाहिए। जो लोग इस दिन उपवास रखते हैं, वो शाम को भोजन ग्रहण करके अपना व्रत खोलते हैं।
अमावस्या तिथि
आरंभ- २७ जुलाई, बुधवार, रात्रि ०९.१४ मिनट से
समाप्त- २८ जुलाई, गुरुवार, रात्रि ११.२४ मिनट पर

अन्य समाचार