मुख्यपृष्ठसमाचारजमकर बरसेंगे बदरा... मुंबई सहित पूरे राज्य में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान

जमकर बरसेंगे बदरा… मुंबई सहित पूरे राज्य में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान

 खेती के अनुकूल होगा मानसून
 ९८ प्रतिशत बारिश का अनुमान
विनय यादव / मुंबई। भले ही गर्मी अपनी तपिश से लोगों को परेशान किए हैं लेकिन इस साल का मानसून अपने समय पर खुशियां और सुकून लेकर आएगा। मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में इस साल जमकर बदरा बरसेंगे। किसानों के लिए राहत की बात है कि यह मानसून खेती के अनुकूल होगा। सूखे के हालात नहीं हैं। इस साल औसतन ९८ प्रतिशत बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। जून से सितंबर महीने का सामान्य बारिश में पांच से दस प्रतिशत तक उतार-चढ़ाव का बदलाव मौसम में देखा जा सकता है। ९६ प्रतिशत से लेकर १०४ फीसदी बारिश को सामान्य माना जाता है।
मौसम की जानकारी देनेवाली निजी एजेंसी ‘स्काइमेट’ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस साल देशभर में मानसून सामान्य रहने की संभावना है। गुजरात में सामान्य से कम तो महाराष्ट्र मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में ज्यादा बारिश होगी। ‘स्काइमेट’ ने फरवरी महीने में जारी किए गए अपने पहले फोरकास्ट में भी २०२२ में मानसून के सामान्य होने की संभावना जताई थी, जिसे बरकरार रखा है। दरअसल लालीना धीरे-धीरे कमजोर हो जाएगा, जिसका हल्का असर पूरे मानसून तक बना रहेगा। इसका अच्छा परिणाम मानसून पर होगा। लालीना में जब पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान कम होता है तो हिंदुस्थान के इंडियन ओसियन, पश्चिमी प्रशांत महासागर और बंगाल की खाड़ी में तापमान ज्यादा बढ़ता है। इससे साउथ वेस्ट मानसून में बारिश अच्छी होती है। जब पूर्वी प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ता है तो हमारे देश में तापमान कम हो जाते हैं। यहां के समुद्री तापमान कम होने से बादल कम बनते हैं और बारिश कम होती है, इसे अलनीनो कहते हैं। लालीना में बारिश ज्यादा होती है और अलनीनो में बारिश कम होती है। पिछले दो साल तक लालीना था। इस साल लालीना का असर कमजोर हो रहा है, इसलिए बीच की स्थिति बन रही है। न लालीना होगा न अलनीनो। इस स्थिति में भी मानसून ठीक-ठाक रहता है। पश्चिम प्रशांत महासागर में वार्मिंग होगी लेकिन इतनी नहीं होगी कि अलनीनो बन जाए। इस लिहाज से इस वर्ष का मानसून अच्छा रहने का अनुमान है।
जलवायु परिवर्तन से बदल रहा मौसम
‘स्‍काइमेट’ के प्रमुख मौसम वैज्ञानिक डॉ. महेश पालावत ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया कि शुरुआत के दो महीने यानी जून-जुलाई में अच्छी बारिश होगी, जो रोपाई-बोआई के लिए बेहतर होगी। अगस्त-सितंबर में थोड़ी कम बारिश होगी। महाराष्ट्र में अच्छी बारिश की संभावना दिखाई दे रही है। केरल और नार्थ कर्नाटक में थोड़ा कम बारिश का पूर्वानुमान है। हालांकि मौसम में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव देखा जाएगा। क्या चक्रवात की भी स्थितियां निर्माण हो सकती हैं? इसके जवाब में पालावत ने बताया कि फिलहाल इस बारे में अभी सटीक नहीं बताया जा सकता। वह बदलते मौसम की स्थितियों पर निर्भर करता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन हो रहा है। धीरे-धीरे होनेवाली बारिश कभी-कभी उग्र रूप धारण कर लेती है। पांच-सात घंटों की मूसलाधार बारिश में कुछ इलाकों में बाढ़ आ सकती है। मुंबई और ठाणे में चार-पांच बार भारी बारिश होने से बाढ़ की स्थिति निर्माण हो सकती है।
किस महीने, कितनी होगी बारिश?
पालावत के अनुसार देशभर में जून में १०७ प्रतिशत, जुलाई में १०० फीसदी, अगस्त और सितंबर महीने में सामान्य से ९०-९५ प्रतिशत बारिश का अनुमान है। अगस्त और सितंबर महीने में सामान्य बारिश की तुलना में ५ से १० प्रतिशत का उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।

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