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महाराष्ट्र में गुंडों का राज!.. कौन चला रहा है?

संजय राऊत

प्रधानमंत्री मोदी नैतिकता की गप मारते हैं, लेकिन महाराष्ट्र जैसे राज्य में उनके आशीर्वाद से गुंडों का राज चल रहा है। उस पर भाजपावाले मौन हैं। महाराष्ट्र के ठेकेदार, व्यापारी, दुकानदार सरकारी गुंडों को रंगदारी देते-देते थक चुके हैं। मंत्रालय में और मुख्यमंत्री के निवास स्थान पर गुंडों के साथ बैठकें होती हैं। क्या यह गंभीर नहीं लगता?
प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ की गुफा में जाकर तपस्या और आत्मचिंतन करने का समय आ गया है। मोदी झूठ बोलते हैं और उस झूठ में ‘हां’ उनके लोग मिलाते हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण की चर्चा का जवाब देते हुए मोदी करीब घंटेभर बोले। उन्होंने विषय से हटकर बात की। ८० मिनट तक वे कांग्रेस पर ही बोलते रहे। पंडित नेहरू ने देश को आलसी बना दिया, ऐसा एक बयान उन्होंने अपने भाषण में दिया। इंदिरा गांधी पर भी उन्होंने बातें की। ब्रिटिश की गुलामी से आजाद हुए अपने देश को कड़ी मेहनत करके खड़ा करना है, यह संदेश नेहरू का ही था। मोदी के मुताबिक, नेहरू ने देशवासियों को आलसी बना दिया है। नेहरू को ऐसा बोलना समस्त मेहनतकश देशवासियों का अपमान है। आजादी के बाद नए हिंदुस्थान का निर्माण करने के लिए हर नागरिक को सबसे ज्यादा काम करना चाहिए और उसके लिए प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने, ‘आराम हराम है’ का नारा दिया। पंडित नेहरू द्वारा लाल किले से सन् १९५९ में दिए गए भाषण में इसका उल्लेख है। इस भाषण में नेहरू ने लोगों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया था। (यही आत्मनिर्भर का मंत्र अब मोदी ने चुरा लिया!) नेहरू ने तब क्या कहा था, उस पर गौर करें, ‘अपने पास हिंदुस्थान में ज्यादा मेहनत करने की आदत नहीं है, उसमें हमारी गलती नहीं है। यूरोपियन, जापानी, चीनी, रशियन, अमेरिकन लोग जितना काम करते हैं, उतना काम हम नहीं करते। कोई जादू की छड़ी घूम गई और वहां खुशहाली आ गई, ऐसा नहीं हुआ है। परिश्रम और बुद्धिमानी से वे सुखी हुए हैं। हम भी मेहनत और समझदारी से आगे बढ़ सकते हैं। देश को आगे ले जाने के लिए कष्ट और मेहनत के अलावा और कोई विकल्प नहीं।’ नेहरू ने देश को आलसी बना दिया, ऐसा मोदी कहते हैं, तो फिर देश के ८० करोड़ लोगों को ५ किलो अनाज मुफ्त बांटने वाले मोदी ने जनता को आलसी और गुलाम ही बना दिया है। लोगों को रोजगार चाहिए और मोदी उन्हें राम का मुफ्त दर्शन कराने निकले हैं। पुणे की एक ‘आईटी’ कंपनी में इंजीनियर की एक भर्ती थी, लेकिन उस एक सीट के लिए पुणे में उस कंपनी के सामने साढ़े तीन हजार ‘बेरोजगार’ इंजीनियरों के कतार में खड़े होने की तस्वीर महाराष्ट्र के तमाम मीडिया ने प्रकाशित कर दी। मोदी ने देश के सुशिक्षित युवाओं को इस तरह सड़कों पर असहाय अवस्था में खड़ा कर दिया, क्योंकि नौकरियां देनेवाले सभी सार्वजनिक उपक्रम मोदी ने अपने मित्रों को बेच दिए हैं। ये सभी सार्वजनिक उपक्रम पंडित नेहरू द्वारा बनाए गए थे, जो मोदी के अमृत काल में नष्ट हो गए। इसलिए पिछले दस वर्षों में बड़े पैमाने पर बेरोजगार युवा अपराध और गुंडागर्दी की ओर मुड़ गए। महाराष्ट्र जैसा उन्नत राज्य भी उसमें अपवाद नहीं रहा।
महाराष्ट्र में सीधे-सीधे गुंडों का ही राज चल रहा है और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और शाह जिम्मेदार हैं। गुंडे जब खुले तौर पर राजनेताओं से मिलते हैं, तब उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। शिवसेना के युवानेता अभिषेक घोसालकर पर गुरुवार को मॉरिस नामक गुंडे ने गोलियां चलाईं और हत्या कर दी। बंदूक चलाने का जो आत्मविश्वास आया, यही गुंडाराज है। यह आत्मविश्वास गुंडों को मोदी-शाह, शिंदे-फडणवीस के कारण मिल रहा है!
अपराध क्यों फला-फूला?
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने एकनाथ शिंदे, अजीत पवार को महाराष्ट्र पर थोप दिया। इन दोनों की छत्रछाया में अपराध-गुंडागर्दी जोरों में फला-फूला। भ्रष्टाचार, अपहरण, जबरन वसूली, हत्या का व्यापार तेजी से बढ़ा और अन्य सारे उद्योग महाराष्ट्र से गुजरात चले गए, फिर भी शिंदे-पवार के काल में आपराधिक व्यापार में वृद्धि हुई। महाराष्ट्र के ठेकेदार एवं इंजीनियर संगठनों ने मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों को संयुक्त पत्र लिखकर गुंडागर्दी से सुरक्षा की मांग की है। ‘सरकार में शामिल पार्टियों के कार्यकर्ता धमकियां देकर वसूली करते हैं, रंगदारी मांगते हैं। नहीं तो ठेकेदारों के अधिकृत सरकारी कामों में बाधा डालकर ठेकेदार और उनके कर्मचारियों पर हमला करते हैं। पहले संबंधित ठेकेदारों की झूठी शिकायत करना और फिर पैसों की मांग करना, इसके चलते कई विकास कार्य अटके पड़े हैं। ठेकेदारों की मूल राशि की तुलना में रंगदारी वसूली का आंकड़ा कहीं ज्यादा है और एक ही समय में सत्ताधारी तीन-तीन दलों के पदाधिकारियों को रंगदारी देते-देते हम सभी त्रस्त हो चुके हैं’, ऐसा इस शिकायत में कहा गया है, जो कि यह गंभीर है। महाराष्ट्र राज्य की इस दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है?
हजारों करोड़ों का काम
सड़क महामंडल, लोक निर्माण विभाग के माध्यम से राज्य में हजारों करो़ड़ों के काम चल रहे हैं। एक सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग में ही ५० हजार करोड़ का काम चल रहा है। सड़क, इमारत, सरकारी संस्थाओं के निर्माण का ये काम है। इसके अलावा जिला परिषदों के माध्यम से १५ हजार करोड़ के काम चल रहे हैं। जल संसाधन ३,५०० करोड़, सिंचाई विभाग २,५०० करोड़, पर्यटन विभाग की २,००० करोड़ की निधि विभिन्न परियोजनाओं में इस्तेमाल की जा रही है। इन सभी कार्यों के ‘टेंडर्स’ जिन्हें मिले, वे सभी ठेकेदार, छोटे उद्यमी, परियोजनाओं पर काम करनेवाले इंजीनियरों ने पिछले दो वर्षों की जबरन वसूली के आगे घुटने टेक दिए हैं।
एक तरफ राजनीतिक कार्यकर्ताओं, गुंडों की टोलियों को फिरौती बांटना तो दूसरी तरफ मंजूर हुई राशि का ३०-४० प्रतिशत सीधे मंत्रियों के हवाले कर देना। इस वजह से विकास को दीमक लग गया है। अजीत पवार का सिंचाई घोटाला ७० हजार करोड़ का, ऐसी घोषणा प्रधानमंत्री खुद करते हैं लेकिन वही पवार आज राज्य के वित्त मंत्री हैं और सभी प्रकार के निधि आवंटन का अपराधीकरण हो गया है। भ्रष्टाचार शब्द इसीलिए पीछे छूट गया है।
गायकवाड का हमला!
महाराष्ट्र में राजनीति की बागडोर आज पूरी तरह से अपराधियों के हाथ में चली गई है। भाजपा विधायक गणपत गायकवाड ने उल्हासनगर पुलिस थाने में घुसकर शिंदे गुट के लोगों पर गोलियां बरसाईं। विधायक गायकवाड का आरोप है कि एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में गुंडों का राज चला रहे हैं और गुंडों को पाल रहे हैं। उस पर भाजपा के सभी मंत्री और नेता मुंह पर ताला लगाकर बैठ गए, क्योंकि महाराष्ट्र में शिंदे पुरस्कृत गुंडागर्दी को मोदी-शाह का खुला आशीर्वाद है। मुंबई में लूट का बड़ा हिस्सा दिल्ली स्थित भाजपा की तिजोरी में जा रहा है, यह उसके पीछे का सीधा अर्थ है। उसके लिए मुंबई सहित महाराष्ट्र पूरी तरह से बर्बाद हो जाए तो भी चलेगा। भारतीय जनता पार्टी का ही एक विधायक आत्मरक्षा के लिए हाथ में पिस्तौल लेता है और पुलिस थाने में ही फायरिंग करता है। इस पर गृहमंत्री की प्रतिक्रिया शून्य! भाजपा के लोग उद्धव ठाकरे पर बोलते हैं, लेकिन शिंदे द्वारा पोषित अपराध पर, जबरन वसूली के कारोबार पर नहीं बोलते। महाराष्ट्र में जो चल रहा है, उस पाप के वे भागीदार बन गए हैं। नगर जिले के राहुरी में वकील दंपति दाभाड़े का अपहरण कर हत्या कर दी गई। ऐसे मामले महाराष्ट्र में रोज घट रहे हैं। मुख्यमंत्री शिंदे मंत्रालय में और उनके ‘वर्षा’ बंगले में गुंडे टोलियों के मुखिया के साथ बैठकें करते हैं। गुंडों को अपनी पार्टी में प्रवेश दिलाते हैं। जेल से गुंडों की रिहाई हो, इसके लिए हस्तक्षेप करते हैं।
मुख्यमंत्री के सुपुत्र का जन्मदिन ४ फरवरी को था। उस दिन मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर गुंडों की भीड़ ही जमा हो गई। गुंडों ने शुभकामनाओं वाले होर्डिंग्स लगाए, जिसकी तस्वीरें प्रकाशित हुईं। गुंडागर्दी का इतना खुला समर्थन और महिमामंडन महाराष्ट्र में इससे पहले कभी नहीं हुआ था। शिंदे गुट में शामिल होने वाले गुंडों को तुरंत पुलिस सुरक्षा देकर सम्मानित किया जाता है, यह बहुत ही गंभीर तस्वीर है। जिन गुंडों की मुंबई-पुणे-ठाणे में पुलिस ने परेड निकाली थी, उन्हीं गुंडों की सुरक्षा के लिए शिंदे ने आज पुलिस तैनात कर दी है। इस काम में अजीत पवार के सुपुत्र पार्थ पवार भी पीछे नहीं हैं। वे भी गुंडों से मिलने फूलों का गुलदस्ता लेकर जाते हैं और श्री अजीत पवार ‘मोदी के पास अपनी वट है’ ऐसा भाषण देते हैं। एकनाथ शिंदे, श्रीकांत शिंदे के साथ कई गुंडों की तस्वीरें प्रकाशित हुईं। प्रधानमंत्री मोदी के पास ‘संघ’ परिवार को ये तस्वीरें भेजनी चाहिए। इसका फायदा नहीं होगा, फिर भी महाराष्ट्र में इन्होंने क्या गंदगी पैâलाई है, उससे उन्हें वाकिफ होने दो। चोरियां, लूटपाट, दहशत और हत्या यही महाराष्ट्र की नियति बन गई है। खतरनाक गुंडे मंत्रालय में घुसकर अपनी ‘रील्स’ बनाते हैं और उन्हें रोकनेवाले कर्मचारियों को शिंदे पुत्र के नाम से धमकियां दी जाती हैं। ये सब महाराष्ट्र में क्यों हो? महाराष्ट्र गुंडों का राज्य बने, इसके लिए ही मोदी-शाह ने शिवसेना फोड़ दी। मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा में बिल्डर ललित टेकचंदानी के दिए गए बयान को पुलिस ने ही खोल दिया तो सरकार की बची-खुची इज्जत भी खत्म हो जाएगी। जिस प्रकार शिंदे सरकार ने गुंडे पाले, उसी प्रकार गुंडों को संरक्षण देने वाले पुलिस अधिकारी भी पाले। ये पुलिस अधिकारी आज ऐसे काम कर रहे हैं, जैसे वे किसी गिरोह के सदस्य हों, मानो शिंदे-पवार-फडणवीस का महाराष्ट्र में गुंडाराज हमेशा कायम रहनेवाला है।
गुंडों का राज जाएगा और उनकी मदद करने वाले खाकी वर्दीधारी गुंडों के सहयोगियों का भी पंचनामा होगा। महाराष्ट्र में पाप नहीं टिकेगा! मोदी की आंखों के सामने ही ये होगा!

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