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आरक्षण आंदोलनकारियों के आगे झुकी सरकार… सभी मांगें मंजूर, जरांगे ने तोड़ा अनशन

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों के आगे ईडी सरकार ने आत्मसमर्पण करते हुए उनकी सभी मांगें मंजूर कर ली हैं। मांगें मंजूर होने के बाद मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता म​​​नोज जरांगे ने कल अनशन समाप्त कर दिया। कल शनिवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे से नई मुंबई में मुलाकात की। उन्होंने जरांगे को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया और अध्यादेश की कॉपी सौंपी। आंदोलन खत्म करने के बाद जरांगे ने कहा कि हम ४ महीने से मराठा आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे थे।
३५० युवाओं ने की आत्महत्या
मराठा आरक्षण के लिए करीब ३५० युवाओं ने आत्महत्या की। आज उनका सपना साकार हुआ। अब सरकार पर आरक्षण लागू करने की जिम्मेदारी है। अगर इस बार धोखा हुआ तो मैं मुंबई के आजाद मैदान आ जाऊंगा।इससे पहले शुक्रवार को जरांगे ने शिंदे सरकार को अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था अध्यादेश जारी नहीं किया गया तो मुंबई के आजाद मैदान पहुंचकर आंदोलन करेंगे। इसके बाद शिंदे सरकार ने देर रात अध्यादेश का ड्राफ्ट जरांगे के पास भेजा। इसमें जरांगे की मांगों का जिक्र था। मनोज जरांगे ने शुक्रवार की देर रात आंदोलन खत्म करने की जानकारी दी।
मराठा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया
राज्यभर से मराठा प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में नई मुंबई के वाशी में जुटे हुए हैं। सरकार और जरांगे के बीच इन मुद्दों पर सहमति बनी। अब तक ५४ लाख लोगों के कुणबी होने का प्रमाण मिला है। उन सभी लोगों को कुणबी का कास्ट सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जरांगे ने सरकार से ४ दिनों के भीतर सर्टिफिकेट देने की मांग की थी। सरकार ने कहा है कि वंशावली मिलान के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इसके बाद सर्टिफिकेट बांटे जाएंगे।

भीड़ के लिए नियम-कायदे नहीं बदले जा सकते- भुजबल
मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र सरकार के पैâसले के उलट मंत्री छगन भुजबल ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मराठा समुदाय जीत गया है, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। भीड़ के लिए नियम-कायदे नहीं बदले जा सकते। मुख्यमंत्री ने फिलहाल अधिसूचना जारी कर दी है। यह बाद में कानून बनेगा। इससे पहले १६ फरवरी तक आपत्तियां मांगी गई हैं। मैं महाराष्ट्र के ओबीसी और अन्य समुदायों के सभी शिक्षित लोगों से आह्वान करता हूं कि वे लाखों की संख्या में इस पैâसले के खिलाफ आपत्तियां भेजें, ताकि सरकार को पता चले कि इसका दूसरा पक्ष भी है।

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