मुख्यपृष्ठनए समाचार‘सरकार’ तोड़ भाजपा नीतीश से हारी ...छह साल में गिरा चुकी है...

‘सरकार’ तोड़ भाजपा नीतीश से हारी …छह साल में गिरा चुकी है चार राज्य सरकारें

•  सुशासन बाबू से खा गई दो बार मात
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
विपक्ष की सरकारें पलटने में माहिर भाजपा बिहार में नीतीश कुमार से मात खा गई। ९ साल में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब बिहार में भाजपा अपनी ही गठबंधन सरकार नहीं बचा पाई। इससे पहले १६ जून, २०१३ को नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़ा था और महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। बीते ६ साल में ७ राज्यों में सेंधमारी की कोशिश कर चुकी भाजपा ४ राज्यों में सरकार बनाने में तो कामयाब रही, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि यही भाजपा बिहार में नीतीश कुमार से दो-दो बार मात खा गई।

मध्य प्रदेश में भाजपा ने किया तख्तापलट
कांग्रेस के असंतुष्ट नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों को भाजपा के पाले में करना और कमलनाथ की सरकार गिरा देना। इसके लिए भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा के हाथ में कमान सौंपी गई। २०१८ के विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस ने निर्दलियों की बैसाखी पर सरकार बनाई। बड़े नेताओं ने सिंधिया से संपर्क साधा और ९ मार्च २०२० को सिंधिया ने अपने समर्थक विधायकों के साथ बगावत कर दी। इन विधायकों को चार्टर प्लेन से बंगलुरु पहुंचा दिया गया। तमाम कोशिशों के बाद भी सिंधिया नहीं माने और कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई।

राजस्थान में सिंहासन हिलाने की कोशिश फेल
राजस्थान का सीएम नहीं बन पाने के कारण नाराज सचिन पायलट के जरिए कांग्रेस विधायकों को भाजपा के पाले में कर अशोक गहलोत की सरकार को गिराना। इसके लिए राजस्थान भाजपा की स्टेट यूनिट को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। राजस्थान में २०१८ के चुनाव में कांग्रेस ने १०० सीटें जीतकर मुश्किल से बहुमत आंकड़ा छुआ था। बसपा और निर्दलियों को कांग्रेस के पाले में कर सीएम अशोक गहलोत ने अपनी कुर्सी मजबूत करने की कोशिश की। ऐसे में भाजपा के ‘ऑपरेशन लोटस’ के लिए सचिन पायलट सबसे मुफीद चेहरा थे। राजस्थान भाजपा के नेताओं ने उनकी नाराजगी को भांप उनसे संपर्क किया। ११ जुलाई २०२० सचिन पायलट ने गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कांग्रेस के १८ विधायकों के साथ गुरुग्राम के एक होटल में पहुंच गए। गहलोत भी अपने पाले वाले विधायकों को एक होटल में रखा। इसके बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से १० अगस्त २०२० को बातचीत कर उन्हें मना लिया। यहां पर गहलोत भारी पड़े।

कुमारस्वामी को सत्ता से किया बेदखल
कांग्रेस के विधायकों को अपने पाले में करके विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा कम करना और सरकार बनाना। भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा को इस पूरी स्ट्रैटजी की कमान सौंपी। २०१७ के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में १०४ सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। बीएस येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ भी ले ली, लेकिन फ्लोर टेस्ट पास नहीं कर पाए। सरकार गिर गई। इसके बाद कांग्रेस के ८० विधायकों ने मिलकर सरकार बना ली। २ साल भी पूरे नहीं हुए थे कि पॉलिटिकल क्राइसिस शुरू हो गई। सरकार फ्लोर टेस्ट में फेल हो गई और सीएम कुमारस्वामी ने इस्तीफा दे दिया।

गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी फिर भी बनी भाजपा सरकार
फरवरी २०१७ के गोवा विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस १७ सीटों के साथ सबसे बड़ा पार्टी बनकर उभरी। सत्ता की चाबी छोटे दलों और निर्दलियों के हाथ में थी। मनोहर पर्रिकर ने २१ विधायकों के समर्थन की बात कहते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया। राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने उन्हें सरकार गठन का न्यौता दे दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गोवा में कांग्रेस के बहुमत का भाजपा ने हरण कर लिया।

अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में फैलाई रंजिश
२०१४ चुनाव के बाद अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। हालांकि कांग्रेस के नेताओं के बीच की रंजिश खुलकर सामने आती रही। आखिरकार १६ सितंबर २०१६ को कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और ४२ विधायक पार्टी छोड़कर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश में शामिल हो गए। पीपीए ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई।

उत्तराखंड में भाजपा की स्ट्रैटजी फेल हुई
सीएम पद से हटाए गए कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा की नाराजगी को भुनाकर कांग्रेस को तोड़ना और विधानसभा में बहुमत हासिल करना था। उत्तराखंड में २०१२ के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा रही। कांग्रेस ३२ सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि भाजपा को ३१ सीटें मिलीं। भाजपा ने बहुगुणा की नाराजगी का फायदा उठाया। १८ मार्च २०१६ को बहुगुणा समेत कांग्रेस के ९ विधायक बागी हो गए। हालांकि, उत्तराखंड के स्पीकर ने जब कांग्रेस के ९ बागियों को अयोग्य घोषित कर दिया तो केंद्र सरकार ने उसी दिन राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

शिंदे समर्थक विधायकों को भाजपा ने तोड़ा
शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक विधायकों को भाजपा के पाले में करना और उद्धव सरकार को गिरा देना। इसके लिए भाजपा नेता और पूर्व सीएम देवेंद्र फडणनवीस के हाथ में कमान सौंपी गई। २१ जून को शिंदे ३५ से अधिक विधायकों के साथ गुजरात पहुंचे। उन्होंने ३५ से अधिक विधायकों के साथ होने का दावा किया। २२ जून को शिंदे ४० विधायकों के साथ गुवाहाटी पहुंचे। बागी विधायकों ने शिंदे को अपना नेता घोषित किया।

 

 

अन्य समाचार

ऊप्स!