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नई परियोजना के निजीकरण का सरकारी जाल, अब मेट्रो पर भी निजी डोरे! सड़कें, अस्पताल शिंदे सरकार ने निजी हाथों की है सुपुर्द, कांजुरमार्ग-बदलापुर मेट्रो-१४ को ‘पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप’ के तहत बनाने की चर्चा

अभिषेक कुमार पाठक / मुंबई
महाराष्ट्र में घात करके सत्ता में आई एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली ‘घाती’ सरकार भी केंद्र की मोदी सरकार की तर्ज पर सिर्फ सियासत कर रही है। घाती सरकार विकास के नाम पर उपलब्धि दिखाने के लिए कुछ खास तो नहीं है लेकिन वह पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा शुरू किए गए काम को नाम बदल कर श्रेय लेने के प्रयास के अलावा परियोजनाओं के निजीकरण से माल बनाने में ही मस्त नजर आ रही है। सड़कों से टोल के जरिए दोनों हाथों नोट बटोरने के अलावा सरकार बेस्ट व अस्पतालों में निजीकरण को बढ़ावा देने का सरकारी प्रयास तेज होता दिख रहा है। इसी बीच अंबरनाथ-बदलापुर-महापे के लाखों निवासियों को राहत देने के लिए एमएमआरडीए के मार्फत साकार की जा रही मुंबई मेट्रो १४ के भी निजीकरण की चर्चाएं तेज होने लगी हैं।
मजेंटा लाइन के नाम से पहचानी जानेवाली मेट्रो- १४ बदलापुर, अंबरनाथ, निलजे, शिल फाटा, महापे, घनसोली के क्षेत्रों को पार करेगी और अंतिम ठाणे क्रीक को पार करके कांजुरमार्ग में ग्रेटर मुंबई की सीमा तक पहुंच जाएगी। कुल मिलाकर इस कॉरिडोर में १५ स्टेशन होंगे, जिनमें से १३ एलिवेटेड, एक अंडरग्राउंड और एक ग्रेड पर होगा।

मेट्रो-१ पर पीपीपी का साया, सिर्फ ४ कोचों की चल रही ट्रेन!
गौरतलब हो कि २०१४ में इस मेट्रो रूट के शुरू होने से पहले की गई स्टडी के आधार पर अनुमान लगाया गया था कि २०२१ में ६.६५ लाख यात्री इस मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे और यात्रियों की सुविधा के लिए कंपनी ने ६ रेकों वाली ट्रेन चलाने की बात कही थी, लेकिन फिलहाल मेट्रो रूट पर हर दिन चार कोचों वाली ३३८ फेरियां चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रतिदिन ४.३५ लाख यात्री यात्रा करते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यदि कंपनी फेरियों की संख्या बढ़ाती है और छह कोचों वाली ट्रेनें चलाती है तो यात्रियों की संख्या और ज्यादा बढ़ सकती हैं। इसी के साथ अधिक से अधिक यात्री मेट्रो का उपयोग कर सकेंगे।

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