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नई मुंबई में एक और हादसे की जमीन तैयार! …५२४ खतरनाक और ६१ बेहद खतरनाक इमारतों पर संकट

सामना संवाददाता / नई मुंबई
नई मुंबई में सिडको द्वारा बनाई गई इमारतों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिन्हें नई मुंबई मनपा ने रहने के लायक करार नहीं दिया है। इनमें से अधिकांश इमारतों का निर्माण २५ से ३० साल पहले हुआ है। हालांकि, इन इमारतों की समय-समय पर मरम्मत होती रही है लेकिन उनकी लाइफ खत्म होती चली गई। इन इमारतों की स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि ये खतरनाक इमारतें किस श्रेणी में आती हैं। कई दफा नई मुंबई मनपा इन इमारतों की बिजली और जलापूर्ति बंद कर चुकी है लेकिन सेटिंग के चलते कुछ दिनों के बाद ही इन इमारतों का बिजली और पानी फिर से शुरू हो जाता है, जिसके कारण नई मुंबई मनपा क्षेत्र में एक और हादसे की जमीन तैयार होने की बात कही जा रही है।
बता दें कि नई मुंबई में ५२४ खतरनाक इमारतें हैं, इनमें सी-१ श्रेणी के तहत ६१ इमारतों को रहने के लिए अयोग्य मानकर तुरंत खाली करने की जरूरत है। श्रेणी सी-२ ए की ११४ इमारतें हैं, जिन्हें खाली कर उनकी रिपेयरिंग की जा सकती है। सी-२ बी श्रेणी की ३०० इमारतें हैं, जिनकी बिना खाली किए रिपेयरिंग की जा सकती है। श्रेणी सी-३ की ४९ इमारतें हैं, जिनमें छोटी-मोटी रिपेयरिंग की आवश्यकता है। इस तरह कुल मिलाकर ५२४ खतरनाक इमारतें हैं। ६१ इमारतें ऐसी हैं, जो बेहद खतरनाक हैं, जिन्हें तत्काल खाली किया जाना जरूरी है। ये इमारतें सिर्फ वाशी में हैं और विडंबना यह है कि इनमें से अधिकांश इमारतों में जान हथेली पर रखकर लोग रह रहे हैं।

क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?
नेरुल के सेक्टर ६ में हादसाग्रस्त इमारत तुलसी भवन के बी विंग में रहने वाले शशि भूषण कहते हैं कि इन पांच बिल्डिंगों में सी विंग की हालत अपेक्षाकृत अधिक खराब थी। वे आगे कहते हैं कि वैसे देखा जाए तो सभी इमारत में फ्लैट्स की हालत अच्छी नहीं थी। हम जिस फ्लैट में रहते हैं वहां की दीवारों पर लगे टाइल्स यूं ही झड़ जाते थे। वहीं डी विंग की दूसरी मंजिल पर रहने वाले अनिल काले बताते हैं कि आंतरिक तौर पर खराब हो चुकी इन इमारतों की कभी स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं की गई थी।

 

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