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‘गुजरात मॉडल’ को गरीबी का आईना! …राज्य की एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीने को मजबूर

• पीएम के दावों की खुली पोल
सामना संवाददाता / गांधीनगर
देश में गुजरात मॉडल का ढोल पीटा जाता है। राज्य में विकास की गंगा बहने की बात कही जाती है लेकिन जो सच्चाई सामने आई है, वो गुजरात मॉडल को आईना दिखाती हुई नजर आ रही है। पीएम मोदी जी का राज्य गुजरात गरीब है। गुजरात की एक तिहाई आबादी, जिसमें ३१ लाख से अधिक परिवार शामिल हैं, गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने को मजबूर है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बीपीएल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ८१६ रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और शहरी क्षेत्रों के लिए १,००० रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिमाह निर्धारित की गई है, जो शहरी निवासियों के लिए प्रतिदिन ३२ रुपए और ग्रामीण निवासियों के लिए २६ रुपए है।
बता दें कि बीते १४ सितंबर को कांग्रेस विधायक तुषार चौधरी के एक सवाल के जवाब में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री बच्चूभाई मगनभाई खाबड़ ने बताया था कि गुजरात में कुल ३१,६१,३१० बीपीएल परिवारों की पहचान की गई है। इनमें १६,२८,७४४ परिवार बेहद गरीब और १५,३२,५६६ परिवार गरीब की श्रेणी में हैं। इसके अलावा आंकड़ों से पता चलता है कि बीपीएल श्रेणी में परिवारों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ रही है। साल २०२०-२१ में १,०४७ परिवार बीपीएल श्रेणी में आ गए थे और केवल १४ परिवार इससे बाहर निकलने में कामयाब रहे। २०२१-२२ में बीपीएल श्रेणी में १,७५१ नए परिवार जुड़े और केवल दो परिवारों की स्थिति में सुधार हुआ। २०२२-२३ में बीपीएल श्रेणी में ३०३ परिवारों की वृद्धि देखी गई और केवल एक परिवार गरीबी से बच पाया।
अमदाबाद के अर्थशास्त्री हेमंत कुमार शाह ने बताया कि ‘अगर हम ३१.६४ लाख गरीब परिवारों में प्रति गरीब परिवार को औसतन छह सदस्यों का मान लें तो इसका मतलब है कि गुजरात में बीपीएल आबादी कुल १ करोड़ ८९ लाख है, यह दर्शाता है कि लगभग राज्य की एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है।

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