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बाल कुपोषण के मामले में बिहार से बदतर गुजरात! … स्वास्थ्य सेवा की हालत भी है खराब

 ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट ने खोली वाइब्रेंट स्टेट की पोल
सामना संवाददता / नई दिल्ली
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि साढ़े तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले देश में अभी भी करोड़ों बच्चे कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं। मतलब कि आजादी के ७५ साल बाद भी हम अपने बच्चों के लिए पोषण की समुचित व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। हिंदुस्थान के लिए आश्चर्य करनेवाली बात तो यह है कि बाल कुपोषण के मामले में गुजरात के हालात बिहार से भी बदतर हैं। तमिलनाडु में कुपोषित बच्चे गुजरात के लगभग आधे हैं। हमेशा विकास की बातें करने वाले भाजपा शासित राज्य गुजरात में ये हालात उनके विकास की पूरी पोल खोल रहा है। हालांकि, इस मामले को लेकर गुजरात विधानसभा में गुजरात सरकार से हमेशा सवाल पूछे जाते रहे हैं। विधानसभा में इस पर भारी वादे करनेवाली गुजरात की भाजपा सरकार के लिए जमीनी स्तर पर बदलाव संभव नहीं है।
जहां एक ओर गुजरात की प्रति व्यक्ति आय और राजस्व में लगातार वृद्धि के साथ, राज्य को तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे अन्य समृद्ध राज्यों के बराबर गिना जाता है, वहीं दूसरी ओर बाल कुपोषण के मामले में गुजरात की स्थिति बिहार और ओडिशा से भी बदतर है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि जहां कुपोषण के नियम और स्वास्थ्य देखभाल की तत्काल जरूरत है, वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की खस्ताहाल देख गुजरात सरकार की पोल खुल गई है।

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