मुख्यपृष्ठटॉप समाचारशौहरों सावधान! तलाक-ए-बिद्दत हुआ बैन, खत्म करो तलाक-ए-हसन! खवातिनों ने उड़ाई मांग

शौहरों सावधान! तलाक-ए-बिद्दत हुआ बैन, खत्म करो तलाक-ए-हसन! खवातिनों ने उड़ाई मांग

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पुरुषों की मनमानी एवं महिलाओं के शोषण को बढ़ावा देनेवाले विवादित तलाक-ए-बिद्दत अर्थात तीन तलाक कानून को खवातिनें यानी मुस्लिम महिलाएं पहले ही बैन करवा चुकी हैं। अब महिलाओं को तड़पानेवाले तलाक-ए-हसन को बैन करवाने के लिए खवातिनों ने कमर कस ली है। बीवी को किश्तों में तलाक देने की इस कुप्रथा के खिलाफ एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई कर सकता है। उक्त मुस्लिम महिला ने याचिका में तलाक-ए-हसन और एकपक्षीय गैर-न्यायिक तलाक के सभी अन्य प्रकारों को मनमाना और तर्कहीन करार देते हुए अवैध व असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। हालांकि बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन के खिलाफ याचिका याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बता दें कि तलाक-ए-हसन में बीवी को एक बार लिखित या मौखिक तलाक दिए जाने के बाद शौहर को पुनर्विचार करके एक-एक महीने के अंतराल पर कुल तीन बार यानी तीन महीने में तीन बार तलाक देना होता है। यदि इस अवधि के दौरान दोनों का साथ रहना फिर से शुरू नहीं किया जाता है, तो तीसरे महीने में तीसरी बार ‘तलाक’ कह देने के बाद तलाक को मुकम्मल माना जाता है और तलाक को औपचारिक मान्यता मिल जाती है। इस दौरान इससे प्रभावित होनेवाली पीड़िता को कड़े मानसिक तनावों से गुजरना पड़ता है। अंधकारमय भविष्य की आशंका उसे हर पल डराती है। इसलिए इसे याचिका में अमान्य एवं असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। इस पर जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अवकाशकालीन पीठ ने मामले का उल्लेख करनेवाले वकील से कहा कि वह अगले सप्ताह पीठ के समक्ष इसे रखें।

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