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हर घर नहीं होगी अरहर! …बुआई हुई कम

-गरीबी में दाल ‘गीली’
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
महंगाई की आग लोगों की पीछा ही नहीं छोड़ रही है। रोज किसी न किसी रूप में बढ़ रही महंगाई से लोगों की समस्या और गंभीर होती जा रही है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, रसोई गैस और जीएसटी की नई दरों के कारण तेल, सब्जी, दूध, अनाज और दूसरी जीवनावश्यक चीजों के दाम पहले ही आसमान छू रहे हैं। लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इसी बीच अब थाली से दालों के गुम होने की नौबत आने से लोगों के खाने की थाली और भी स्वादहीन हो सकती है। बुआई कम होने से ज्यादातर घरों में इस्तेमाल की जानेवाली ‘अरहर’ (तुअर) की दाल बेतहाशा महंगी होती जा रही है, ऐसे में हर घर में अरहर की दाल का उपभोग अब मुश्किल हो जाएगा।

बता दें कि पिछले कुछ सप्ताह में उड़द और अरहर दाल की कीमतों में १५ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। भारी बारिश के कारण दलहन फसल को नुकसान, कम पुराना स्टॉक और रकबे में कमी के कारण आने वाले समय में दाम और बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले ६ हफ्तों में अरहर दाल और उड़द दाल की कीमतों में १५ फीसदी से अधिक की उछाल दर्ज की गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह जलभराव के कारण फसल के नुकसान की आशंका, चालू खरीफ सीजन में रकबे में गिरावट और कम स्टॉक है। महाराष्ट्र के लातूर में अच्छी गुणवत्ता वाली अरहर दाल की कीमत पिछले ६ सप्ताह में ९७ रुपए से बढ़कर ११५ रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है। कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी ताजा बुवाई के आंकड़ों के अनुसार, अरहर का रकबा एक साल पहले की तुलना में ४.६ प्रतिशत कम हो गया है जबकि उड़द के रकबे में २ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

उड़द की कीमतों में आ सकती है कमी
कृषिमूर्ति को उम्मीद है कि बारिश के नुकसान के बावजूद, उड़द की कीमतें कम रहने की संभावना है, वैसे भारत को मुद्रा मुद्दों के कारण पिछले चार महीनों के दौरान म्यांमार से ज्यादा उड़द नहीं मिली, जिससे मासिक उड़द आयात ५० प्रतिशत से अधिक कम हो गया। अब मुद्रा मुद्दा म्यांमार के निर्यातकों के लिए अनुकूल हो गया है, जिससे हमें आयात करने में मदद मिलेगी।

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