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मेहनतकश : अभिजीत ने नहीं मानी हार

आनंद श्रीवास्तव

अभिजीत तांबडकर, जिसके नाम में ही जीत शब्द जुड़ा हुआ हो भला उसकी हार वैâसे हो सकती है? अभिजीत के सपनों को भी उन्होंने अपने दम पर पूरा किया और आज थिएटर की दुनिया में अपना नाम बनाया है। अभिजीत नाम थिएटर की दुनिया में काफी कम लोग जानते हैं, लेकिन बतौर मेहनतकश इन्हें समूचा सायन प्रतीक्षा नगर का बच्चा-बच्चा पहचानता है। आज वे शिप पर नौकरी करने के साथ-साथ मराठी रंगमंच पर भी विभिन्न नाटक के माध्यम से दिखाई देते हैं।
आज अभिजीत के चेहरे पर जो खुशी है वह एक दशक पहले नहीं थी, जब उनके पिता का देहांत हो गया था। तब घर की सारी जिम्मेदारियां इन्हीं के कंधे पर आ गई थी। घर चलाने के लिए उन्हें नौकरी करनी पड़ी और इस नौकरी के लिए उन्हें बारहवीं के बाद पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी। अभिजीत के पिता नेवी में थे। अभिजीत ने बहुत कोशिश की, कि लेकिन पिता की जगह उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई। हालांकि, वहां ऐसा कोई नियम नहीं था। पढ़ाई भी बीच में ही छोड़ चुके थे। ऐसे में स्वाभाविक है कि इन्हें कोई अच्छी नौकरी कहां मिल पाती? लेकिन इसके बावजूद अभिजीत ने हिम्मत नहीं हारी और वह एक वैंâटीन में काम करने लगे। इस वैंâटीन के ओनर के मार्गदर्शन में उन्होंने उरण के शिप आईएनएस विहार में मैकेनिकल की इंटर्नशिप की। वैंâटीन का काम करते हुए अभिजीत ने इंटर्नशिप पूरी कर ली और शिपिंग इंजिन मैकेनिकल में ट्रेनी के तौर पर उन्हें अस्थायी काम मिल गया। लेकिन अभिजीत ने वैंâटीन की नौकरी छोड़ी नहीं थी। उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें आखिरकार, इंजिन ड्राइवर मैकेनिक के काम पर स्थायी नौकरी के लिए चुन लिया गया। ड्यूटी से छुट्टी मिलने के बाद अभिजीत ड्रामा की प्रैक्टिस करने लगे। अभिजीत को बचपन से ही अभिनय का शौक रहा है। ऐसे में रंगमंच से जुड़ने की ख्वाहिश थी, सो उस ख्वाहिश को पूरा करने में वे जुट गए। आज वह `विठ्ठला’ में गांव वाला, `किडीप’ में वकील और `अलादीन’ में अलादीन की भूमिका निभा रहे हैं। रंगमंच नाटक में निभाए गए छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका के कारण आज वे बहुत खुश हैं कि जिंदगी में जो भी सोचा वो हासिल किया, लेकिन इसके लिए मेहनत बहुत करनी पड़ी।
(यदि आप भी मेहनतकश हैं और अपने जीवन के संघर्ष को एक उपलब्धि मानते हैं तो हमें लिख भेजें या व्हाट्सऐप करें।)

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