मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनामेहनतकश : हार ना मानना ही सबसे बड़ी जीत है!

मेहनतकश : हार ना मानना ही सबसे बड़ी जीत है!

अनिल मिश्रा

कहते हैं कि व्यक्ति में अगर लगन और मेहनत करने का जज्बा हो तो उसे सफलता पाने में कठिनाइयां जरूर आ सकती हैं लेकिन उसे सफलता अवश्य मिलती है। आज हम ऐसे ही एक मेहनतकश की दास्तां बताने जा रहे हैं, जिसकी कड़ी मेहनत ने उन्हें न केवल सफलता दिलाई बल्कि आज वे दूसरों की मदद कर उनका भी कल्याण कर रहे हैं। यूं तो उल्हासनगर में सैक़ड़ों सरकारी राशन की दुकान चलानेवाले हैं। उनमें से एक राजन वेलकर भी हैं। वेलकर का मानना हैं कि वे सरकारी राशन की दुकान को सेवा निष्ठा के साथ चलाते हैं। निष्ठा, ईमानदारी, सेवा-भावना,समर्पण का ही नतीजा है कि आज उनका परिवार संपन्न है। सामाजिक, राजनीतिक हर क्षेत्र में सम्मानित हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष में उप शहरप्रमुख हैं। पिता धनराज वेलकर शिवसेना समर्थक थे। पिता उल्हासनगर शिवसेना शहर प्रमुख रमेश मुकने के कट्टर समर्थक थे, जिसके कारण उनका पूरा परिवार शिवसेना समर्थक बन गया है।
गौरतलब है कि राजन वेलकर उल्हासनगर दो के महात्मा गांधी नगर में एक सामान्य व्यक्ति के समान रहते हैं। उनके पिता कोर्ट में क्लर्क थे। पिता की मुलाकात शिवसेना नेता एडवोकेट लीलाधर डांके से कोर्ट हो गई। उनके पिता भी शिवसेना के कट्टर समर्थक थे। पिताजी ने एक विद्यालय की संस्थापना की। विद्यालय का नाम शारदा विद्यालय रखा। परिसर के प्रतिष्ठित लोगों को लेकर विद्यालय को गति दी। विद्यालय को चलाने के लिए अपने वेतन से टीचरों को वेतन देते थे। पिता द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्य के कारण आज दर्जनों लोगों को जहां रोजगार मिला, वहीं अखिल भारतीय लोकसेवा संघ जैसी संस्था बनाकर शारदा विद्यालय शुरू किया गया। विद्यालय के माध्यम से गरीब नगर, महात्मा गांधी नगर, आदि परिसरों के बच्चों को शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। पिता के बाद खुद भी सचिव का पद संभाला था। शारदा विद्यालय के कई छात्र आज उच्च पदों पर हैं। विद्यालय आज भी शुरू है। कल भी शिक्षा देने का कार्य शुरू रहेगा। पिता की सेवा, समर्पण, त्याग को ध्यान में रखकर वेलकर ने बस्ती के सुधार के लिए तमाम तरह के काम किए। उनके सेवा-भाव को देखकर बस्ती के लोगों ने पत्नी सुरेखा वेलकर को शिवसेना से दो बार नगरसेवक बनाया। नगरसेवक रहते हुए बस्ती, में पानी, रास्ते, कई तरह के समाजसेवा संबंधी कार्य किए। सुरेखा वेलकर एक तेज, जागरूक नगरसेविका रही हैं। राजन वेलकर का कहना हैं कि उन्होंने सरकारी राशन की दुकान को सेवा समझकर चलाया। ऐसे समय में बस्ती के लोगों को राशन मुफ्त में दिया गया। राजन का मानना है कि जीवन में हार ना मानना ही सबसे बड़ी जीत होती है।

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