मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : मजदूरी कर परिवार को दी नई जिंदगी

मेहनतकश : मजदूरी कर परिवार को दी नई जिंदगी

अशोक तिवारी

सपनों के शहर मुंबई में आनेवालों को शायद यह पता भी नहीं होता है कि मुंबई उन्हें जिंदगी में क्या-क्या प्रदान करनेवाली है। कभी-कभार कुछ ऐसे वाकये सामने आते हैं जहां इंसान को खुद अपनी तरक्की पर सहसा यकीन नहीं होता। ऐसा ही एक वाकया महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के सातारा तालुका में रहनेवाले सुभाष घाडगे का है। गरीब परिवार के सुभाष घाडगे के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बच्चे थे। सातारा में जब उनके सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हुआ तो परिवार को लेकर वे मुंबई आ गए और कुर्ला के एक कारखाने में बतौर मजदूर हीरा पॉलिश का काम करने लगे। ७० के दशक में उनकी पगार मात्र कुछ रुपए ही थी। कम पगार में परिवार की जिम्मेदारी को पूरा करते हुए सुभाष घाडगे ने अपने तीनों बच्चों को पढ़ाने का दौर जारी रखा। हालांकि, इस कार्य के लिए उन्हें कंपनी में ओवर टाइम करना पड़ता था। दुर्दैव से जब सुभाष घाडगे का बड़ा बेटा प्रशांत घाडगे सातवीं कक्षा में पढ़ रहा था तभी उनकी मौत हो गई। इसके बाद घाडगे का पूरा परिवार सड़क पर आ गया।
लेकिन बड़े बेटे प्रशांत घाडगे ने परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए मुंबई के वाशी मार्वेâट में बतौर माथाड़ी कामगार मजदूरी का काम शुरू कर दिया। बतौर माथाड़ी कामगार मजदूरी करने पर उन्हें मात्र कुछ पैसे ही मिलते थे लेकिन पैसे इतने होते थे कि उनसे चार लोगों के परिवार की रोजी-रोटी की जरूरतें पूरी हो जाती थीं। जीवन में कठिन परिश्रम करते हुए प्रशांत घाडगे ने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री लेते हुए अपने दूसरे भाई को इंजीनियर बनाया। इसके अलावा अपने तीसरे भाई को ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में डिग्री दिलवाई। कई बरसों तक माथाड़ी कामगार का काम करनेवाले प्रशांत घाडगे ने बाद में अपना खुद का कंस्ट्रक्शन बिजनेस शुरू किया। धीरे-धीरे यह बिजनेस चल निकला और प्रशांत सुभाष घाडगे का परिवार मुंबई में सेटल हो गया। अपनी गरीबी के दौरान अन्य गरीब लोगों की समस्याओं को देखते हुए प्रशांत सुभाष घाडगे के पास जब पैसे आए तो वे समाजसेवा से भी जुड़ गए और ‘जय भवानी महिला संस्थान’ नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़ गए और समाजसेवा का कार्य करने लगे। पिछले १० वर्षों से प्रशांत सुभाष इस संस्था के माध्यम से महिलाओं को रोजगार दिलाने का प्रयास करते हैं। इस संस्था के द्वारा रोजगार बचत गट नामक एक स्कीम शुरू की गई है, जिसके तहत छोटे-छोटे माध्यमों से पैसे देकर महिलाओं को स्वयं रोजगार करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस बचत गट योजना के द्वारा सैकड़ों महिलाएं आज अपना खुद का रोजगार शुरू कर चुकी हैं और जीवन-यापन के लिए अच्छे-खासे पैसे भी कमा रही हैं। इसके अलावा क्षेत्र में ब्लड डोनेशन और मुफ्त मेडिकल वैंâप जैसी सुविधा भी इस संस्था द्वारा समय-समय पर की जाती है। प्रशांत घाडगे का मानना है कि जीवन में कठिन समय व्यक्ति को मजबूत बनाने के लिए आता है।

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