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मेहनतकश : नौकरी नहीं, व्यापार करूंगा!

रवींद्र मिश्रा

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सजनवा भीटी राउत गांव के एक गरीब परिवार में सुनील यादव का जन्म हुआ। सुनील के पिता रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई आए और दहिसर स्थित एक बिल्डिंग में उन्हें वॉचमैन की नौकरी मिल गई। सुनील के पिता मेहनती और ईमानदार थे लेकिन उन्हें जितना वेतन मिलता उससे घर खर्च नहीं चल पाता था। इसलिए जिस बिल्डिंग में वे वॉचमैनी करते थे सुबह वहीं उठकर गाड़ी धोने का भी काम करने लगे। गाड़ी धोते-धोते उन्होंने गाड़ी चलाना सीख लिया। एक दिन वे किसी इंडस्ट्रीयल एरिया से गुजर रहे थे। जहां काफी तादाद में टेंपो खड़े थे। अंतत: वहीं उन्हें टेंपो चलाने की नौकरी मिल गई। इसके बाद उन्होंने गांव से परिवार को मुंबई बुला लिया और एक चाल में भाड़े पर घर लेकर रहने लगे। परिवार में पत्नी, एक बेटा तथा दो बेटियां थीं। बेटे और बेटियों को उन्होंने पढ़ाना शुरू किया। बड़े बेटे सुनील का नाम कॉलेज में लिखवा दिया। इस बीच गांव में किसी रिश्तेदार के यहां शादी पड़ी और पूरा परिवार गांव गया। एक दिन चौपाल पर सुनील की मुलाकात एक बुजुर्ग से हुई। बुजुर्ग व्यक्ति ने सुनील से पूछा, ‘क्या करते हो?’ सुनील ने कहा, ‘मैं पढ़ाई करता हूं।’ अब बुजुर्ग ने पूछा, ‘पढ़ के क्या करोगे?’ सुनील ने कहा, ‘नौकरी करूंगा।’ सुनील का जवाब सुनकर बुजुर्ग के मुंह से निकला, ‘करैं नौकरी दुइ जन खांय, लड़िका होय ननियउरे जांय।’ बुजुर्ग की बात सुन सुनील ने कहा, ‘दादा, इसका मतलब भी समझा दो।’ अब बुजुर्ग ने कहावत का मतलब सुनील को समझाया। कहावत का मतलब समझ में आते ही सुनील ने तत्क्षण निर्णय लिया कि वो जीवन में कभी नौकरी नहीं करेगा। खैर, शादी के बाद परिवार मुंबई लौट आया। सुनील अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ही रहा था कि तभी उसे एक कंपनी में अपरेंटिस का जॉब मिल गया। सुनील जब भी काम पर जाता उसे बुजुर्ग द्वारा कही कहावत स्मरण हो आती। एक दिन सुनील ने अपने पिता से कहा, ‘मैं नौकरी नहीं करूंगा।’ सुनील की बात सुनकर पिता ने हैरानी से पूछा, ‘तो फिर क्या करोगे?’ सुनील ने कहा, ‘मैं व्यापार करूंगा।’ पिता ने पूछा, ‘कौन-सा व्यापार करोगे?’ सुनील बोला, ‘मैं गाड़ी मालिक बनूंगा।’ बेटे की जिद के आगे बाप की एक न चली। सुनील ड्राइवरी सीखकर टैंपो चलाने लगा। अपनी मेहनत और ईमानदारी से आज वो बहुत-सी गाड़ियों का मालिक है। जीवन में सफल हो चुके सुनील आज जब कभी किसी से मिलते हैं तो बुजुर्ग वाली कहानी को बताते हुए कहते हैं कि नौकरी पेशा इंसान सिर्फ अपना परिवार पाल सकता है। अगर कोई व्यवसाय करता है तो उससे जुड़ने वाले हर व्यक्ति का परिवार पलता है और उनकी दुआएं भी मिलती हैं।

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