मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : मजदूरी से लेकर पत्रकारिता तक का सफर

मेहनतकश : मजदूरी से लेकर पत्रकारिता तक का सफर

अनिल मिश्र

हर इंसान का कुछ न कुछ सपना होता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। अपने सपने को पूरा करने के लिए इंसान दिन-रात मेहनत करता है। लेकिन ऐसे विरले ही होते हैं जो अपने सपने को हकीकत में बदल पाते हैं। इन्हीं में से एक हैं प्रकाश दोदे, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और निष्ठा से न केवल गरीबी को दूर किया, बल्कि पत्रकार बन कर लोगों की समस्याओं का भी निवारण कर रहे हैं। प्रकाश दोदे का सपना महाराष्ट्र पुलिस सेवा में भर्ती होकर पुलिस अधिकारी बनना था और देश सेवा के साथ-साथ गरीबों को न्याय दिलाना था। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत भी की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। प्रकाश रामचंद्र दोदे बताते हैं कि उनका जीवन बचपन में काफी संघर्षमय परिस्थितियों में बीता है। उनके पिता रेलवे में नौकरी करते थे, लेकिन अकसर बीमार रहने से उनका स्वर्गवास हो गया। जिससे माता जी पर घर चलाने के अलावा चार बच्चों को पालने की जिम्मेदारी भी आ गई। घर में एक बेटा (प्रकाश दोदे) और तीन बेटियां थीं, सभी छोटे थे। आर्थिक संकट को दूर करने के लिए माता मजबूरी में इमारत के निर्माणकार्य में काम करने लगीं। सालों तक दिन-रात काम करने के बाद पाई-पाई जुटाया और तीनों बेटियों की किसी तरह से शादी कर दी। मूल रूप से कसारा के रहनेवाले प्रकाश दोदे बताते हैं कि उनका नासिक में ननिहाल है। कसारा में रहते हुए चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। घर की स्थिति को देखते हुए मजदूरी की। वे कड़िया का काम करते हुए ईंट और रेती ढोया करते थे। एक दिन की मजदूरी ७५ पैसे मिलती थी। इसके बाद फिर पढ़ाई शरू की। थोड़े और बड़े हुए तो पंचवटी एक्सप्रेस ट्रेन में चिक्की बेचने लगे। चिक्की बेचते समय आए दिन आरपीएफ द्वारा परेशान किया जाता था, जिसके बाद उस काम को भी छोड़ दिया। फिर उल्हासनगर में चाचा के पास आ गए। उल्हासनगर १७ सेक्शन के मनपा विद्यालय में सातवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद अपने नाना के यहां इगतपुरी चले गए और वहां से उन्होंने बी.कॉम प्रथम वर्ष तक की पढ़ाई की। इसी दौरान वे लोअर डिप्लोमा इन कॉपरेटिव का कोर्स करने नासिक चले गए। उसके बाद वे फिर से उल्हासनगर आ गए। शहाड रेलवे स्टेशन के पास प्रिâज की दुकान पर फ्रिज मरम्मत का काम सीखने लगे। उसमें मन नहीं लगा तो काम छोड़ दिया और रिक्शा चालक बन गए। इसी दौरान उनमें लोगों की सेवा करने और सामाजिक सेवा करने की इच्छा जागी। उनके चाचा गणपत दोदे कसारा में पत्रकार थे। उनसे पत्रकारिता सीख कर शाहपुर के ‘लोकहित’ पेपर में पत्रकारिता करने लगे। इसके अलावा वे ‘वाचक आमचा’ नामसे एक यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। रिक्शा यूनियन के मार्फत रिक्शा चालकों की समस्याओं को दूर करते हैं और न्यूज चैनल के माध्यम से लोगों के हितों के लिए आवाज उठाते हैं।

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