मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : मुंबई ने मुझे सब कुछ दिया है

मेहनतकश : मुंबई ने मुझे सब कुछ दिया है

रामदिनेश यादव

कहते हैं कड़ी मेहनत और कुछ कर दिखाने की जिद व्यक्ति को उसके सपने पूरे करने में मदद करती है। फिर चाहे जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं व्यक्ति उन सभी तकलीफों को मात देते हुए अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचता है और अपने सपने को साकार कर दिखाता है।
मायानगरी मुंबई भी ऐसे कई लोगों के सपनों को पूरा करती है और खुली बांहों के साथ दूसरे राज्य से आए व्यक्तियों को यहां आसरा देती है। ऐसे ही एक कहानी इंदल विश्वकर्मा की है, जो उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई आए थे। एक छोटे से गांव से निकलकर शहर की तरफ इंदल विश्वकर्मा के सपनों की सवारी चल पड़ी थी। उसे किसी ट्रेन का ठीक से नाम भी नहीं पता था, वो बस इतना जनता था कि यह ट्रेन मुंबई जाती है, जहां उसके गांव के आस-पास के लोग रहकर मेहनत-मजदूरी करते हैं। शायद उसे सहारा मिल जाए। हुआ भी ऐसा ही, ट्रेन में धक्के खाते हुए मुंबई पहुंचे इंदल को यहां अपने गांव के एक व्यक्ति के घर आसरा मिला।
माझगांव में एक झोपड़ी में इंदल को अस्थायी रूप से रहने के लिए जगह मिल गई और यहीं से उसकी नई जंग की शुरुआत हुई। गांव में गरीबी और तमाम समस्याओं को देख चुके इंदल मुंबई में मेहनत कर उन सभी से उबरने में जुट गए। रोजी-रोटी के लिए इंदल बगल में एक गैराज में जाकर मोटर बाइक की मरम्मत का काम सीखने लगे। धीरे-धीरे इंदल वहां बाइक रिपेयर करने में निपुण होने लगे थे। सिलसिला यूं ही चलता रहा और लगभग ५ साल में हर प्रकार के मोटरसाइकिल रिपेयर करने में वे निपुण हो गए।
बता दें कि इंदल को एक सफल आदमी बनना था। इस तरह नौकरी से कितने दिन चलता। ऐसे में उन्होंने एक दोस्त के सहारे रे रोड में एक छोटे से गैराज की शुरुआत की, जहां इंदल अपने सपनों को साकार करने के लिए क़ड़ी मेहनत करने लगे और यहां इंदल की मेहनत भी धीरे-धीरे रंग लाई। अगले ३ सालों में इंदल ने अपनी मेहनत और अपने कुशल व्यवहार के चलते अपने कस्टमर का अच्छा बेस बैंक खड़ा कर लिया। उनके पास अब तीन से चार लड़के काम करने के लिए हैं।
हर समय उनके गैराज में बड़े पैमाने पर बाइक रिपेयरिंग का काम होता है। अपनी मेहनत से धीरे-धीरे समृद्ध हो रहे इंदल अपने माता-पिता और परिवार का भी ध्यान रखते हैं। एक तरफ इंदल गांव में भी धीरे-धीरे अपने मां-बाप सहित पूरे परिवार को व्यवस्थित माहौल देने में जुटे रहे तो वहीं मुंबई में भी इंदल ने अलग-अलग जगह धीरे-धीरे इंवेस्टमेंट शुरू किया। इंदल मुंबई में खुद का घर लेकर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। इंदल की तीन बेटियां हैं, जो पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज हैं। इंदल का कहना है कि मायानगरी मुंबई ने मुझे रोटी, कपड़ा और मकान सबकुछ दिया है।

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