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मेहनतकश : १२ वर्षों तक की मजदूरी, मेहनत से बने कंपनी के मालिक

अशोक तिवारी

कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन में कामयाबी प्राप्त करने के लिए पहले कठिन परिश्रम के दौर से गुजरना पड़ता है। यही कठिन परिश्रम उसके जीवन का इम्तिहान होता है। इस इम्तिहान को जो पास कर लेता है, उसके बाद सफलता उसके कदम जरूर चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मूल रूप से तमिलनाडु के रहनेवाले कुमार नईनार तेवर ने। कुमार नईनार ने मेहनत-मजदूरी कर सफलता के उस मुकाम को हासिल कर लिया, जहां पहुंचने की कभी वे कल्पना भी नहीं कर सकते थे। मुंबई के साकीनाका परिसर में रहने वाले कुमार नईनार तेवर ने तमिलनाडु से दसवीं तक की पढ़ाई की और वर्ष १९९४ में मुंबई में रोजी-रोटी की तलाश में आ गए। कुमार नईनार तेवर के पिता असल्फा के जंगलेश्वर मंदिर के पास स्थित काले पत्थर की खदान में मजदूर का काम करते थे। कुमार नईनार के पिता ने उन्हें एक साड़ी की कंपनी में नौकरी लगवा दी, लेकिन कुमार नईनार तेवर ने सोचा कि मजदूर की नौकरी करने से जिंदगी में कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगेगी, इसके लिए खुद का हुनर होना बहुत ही जरूरी है। इसके बाद कुमार नईनार तेवर ने इसी कंपनी में साड़ी की डिजाइनिंग करने का काम सीखना शुरू कर दिया। कुछ दिनों तक कंपनी में काम सीखने के बाद कुमार नईनार तेवर ने दूसरी कंपनी की तरफ रुख किया, वहां पर उन्होंने और भी डिजाइनिंग का काम सीखना जारी रखा। इसी तरह वर्ष १९९४ से लेकर वर्ष २००६ तक कुल १२ वर्षों तक कुमार नईनार तेवर ने विभिन्न कंपनियों में मजदूर के तौर पर काम किया। १२ वर्षों में कुमार नईनार तेवर ने अच्छी-खासी रकम अपने पास जमा कर ली थी, जिसके बाद वर्ष २००६ में उन्होंने साकीनाका के वरदान गली में खुद की कंपनी शुरू की। खुद की कंपनी खोलने के बाद कुमार नईनार तेवर की किस्मत चमक उठी और कंपनी चल निकली। आज कुमार नईनार तेवर के पास विदेश से गारमेंट पर डिजाइन करने के अच्छे-खासे ऑर्डर आते हैं। उन्होंने अपने बच्चों को जीवन में शिक्षा का महत्व समझाया, जिसके बाद बेटे ने बीबीए तो बेटी ने बीएससी की डिग्री हासिल की। कुमार नईनार का सपना है कि उनकी कंपनी का कारोबार भारतवर्ष में पैâले और उसमें कम से कम १,००० बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।

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